गाजियाबाद केस: सुप्रीम कोर्ट ने SIT बनाई, रेप-मर्डर जांच तेज
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सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद रेप-मर्डर केस में तीन महिला आईपीएस अधिकारियों की SIT गठित करने का आदेश दिया, दो सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
पीड़िता के पिता ने पुलिस पर लापरवाही और बयान बदलने का दबाव बनाने का आरोप लगाया, साथ ही निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार की जांच भी होगी।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही फिलहाल रोक दी है और SIT को सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने का जिम्मा सौंपा है।
Ghaziabad Case/ गाजियाबाद में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप और हत्या के सनसनीखेज मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस गंभीर घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए Supreme Court of India ने विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया है। कोर्ट ने Uttar Pradesh के डीजीपी को निर्देश दिया है कि तीन महिला आईपीएस अधिकारियों की टीम बनाई जाए, जो मामले की निष्पक्ष जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
घटना 16 मार्च की बताई जा रही है, जब आरोपी ने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। कुछ समय बाद बच्ची घर से करीब 500 मीटर दूर झाड़ियों में गंभीर हालत में मिली। परिजनों के अनुसार, उसे तत्काल इलाज के लिए दो निजी अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन वहां भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। बाद में जिला अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।
मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत में केवल हत्या का मामला दर्ज किया और बाद में रेप की धारा जोड़ी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया। इन आरोपों के चलते उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले पुलिस कमिश्नर और संबंधित एसएचओ को तलब किया था। इसके बाद 24 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने आईजी रैंक की महिला अधिकारी के नेतृत्व में तीन महिला आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि शनिवार सुबह 11 बजे तक टीम का गठन सुनिश्चित किया जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसआईटी न केवल अपराध की जांच करेगी, बल्कि निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार करने के आरोपों की भी जांच करेगी। अदालत ने निर्देश दिया कि एसआईटी सभी पहलुओं की जांच कर अपनी सप्लीमेंट्री रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट को दो सप्ताह के भीतर सौंपे। इस दौरान ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही स्थगित रहेगी।
पुलिस की ओर से बताया गया कि आरोपी को घटना के अगले दिन गिरफ्तार कर लिया गया था और उसने अपराध स्वीकार भी किया है। चार्जशीट दाखिल करने की बात भी सामने आई है, लेकिन पीड़ित परिवार पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है। उनका आरोप है कि मामले के कुछ अहम पहलुओं को दबाने की कोशिश की जा रही है।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है। अब सभी की नजरें एसआईटी जांच पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आने और दोषियों को कड़ी सजा मिलने की उम्मीद है।