राज्यसभा में बड़ा उलटफेर: AAP सांसद BJP में, NDA बहुमत के करीब
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AAP के सात सांसदों के BJP में शामिल होने से NDA की ताकत राज्यसभा में बढ़कर 145 पहुंची, जिससे राजनीतिक संतुलन में बड़ा बदलाव आया।
बीजेपी बहुमत के करीब पहुंची, लेकिन दो-तिहाई बहुमत अभी दूर, जिससे संवैधानिक संशोधन जैसे अहम विधेयकों में विपक्ष की भूमिका बनी रहेगी।
सांसदों का यह कदम ‘विलय’ के तहत माना जा रहा है, जिस पर अंतिम फैसला राज्यसभा अध्यक्ष की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
New Delhi/ राज्यसभा की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से सत्ता समीकरण तेजी से बदल गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत उच्च सदन में बढ़कर 145 तक पहुंच गई है। इससे संसद के भीतर राजनीतिक रणनीतियों और विधायी प्रक्रियाओं पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।
राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 244 है, जिसमें साधारण बहुमत के लिए 123 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। AAP के सात सांसदों के शामिल होने के बाद BJP की ताकत 113 तक पहुंचने का अनुमान है। यदि सात नामांकित सांसदों और दो निर्दलीय सांसदों का समर्थन भी जुड़ जाता है, तो यह आंकड़ा 122 तक पहुंच सकता है, जो बहुमत से महज एक कदम दूर है। यह स्थिति सत्तारूढ़ दल के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
हालांकि, दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अभी भी दूर है। राज्यसभा में इसके लिए 163 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है, जबकि वर्तमान में NDA इस संख्या से काफी पीछे है। इसका मतलब यह है कि संवैधानिक संशोधन जैसे बड़े विधेयकों को पारित कराने में अभी भी सरकार को विपक्ष का सहयोग लेना पड़ सकता है।
लोकसभा की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। वहां भी NDA के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, जिसके लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है। यही वजह है कि कई महत्वपूर्ण विधेयक, जैसे महिला आरक्षण से जुड़ा प्रस्ताव, पारित नहीं हो पाए थे। ऐसे में राज्यसभा में बढ़ती ताकत सरकार के लिए आंशिक राहत जरूर है, लेकिन पूरी मजबूती अभी हासिल नहीं हुई है।
AAP के 10 में से 7 सांसदों का BJP में जाना तकनीकी रूप से ‘विलय’ की श्रेणी में आता है। इस प्रक्रिया के तहत पार्टी ने औपचारिक आवेदन भी किया है, जिस पर राज्यसभा अध्यक्ष का फैसला महत्वपूर्ण होगा। यदि इस विलय को मंजूरी मिल जाती है, तो संबंधित सांसदों की सदस्यता सुरक्षित रहेगी।
AAP नेता राघव चड्ढा ने इस पूरे घटनाक्रम को संवैधानिक रूप से वैध बताया है। उन्होंने कहा कि दो-तिहाई से अधिक सांसदों के समर्थन से लिया गया निर्णय पूरी तरह कानूनी है और इससे किसी की सदस्यता पर खतरा नहीं है।
आने वाले समय में यह राजनीतिक बदलाव संसद के कामकाज, विधेयकों के पारित होने और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है। NDA के लिए यह मजबूती का संकेत है, जबकि विपक्ष के लिए यह एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।