बजट सत्र के बीच स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव
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बजट सत्र के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, संसद में संभावित बहस और राजनीतिक रणनीति ने बढ़ाई सियासी हलचल।
लोकसभा में सत्ताधारी गठबंधन के बहुमत के कारण प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम, लेकिन विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण मुद्दा बता रहा है।
New Delhi/ संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। इस प्रस्ताव को लेकर आज सदन में चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी नेताओं को पर्याप्त अवसर नहीं दिया और कई मामलों में सत्ताधारी पक्ष के पक्ष में निर्णय लिए।
लोकसभा के नियमों के अनुसार स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। जब किसी सदस्य द्वारा प्रस्ताव का नोटिस दिया जाता है, तो उसे सदन के समक्ष पेश किया जाता है। इसके बाद कार्यवाही के दौरान चेयर की ओर से प्रस्ताव को बुलाया जाता है। इस समय कम से कम 50 सांसदों को अपने स्थान पर खड़े होकर प्रस्ताव का समर्थन करना होता है। यदि 50 सदस्य समर्थन में खड़े हो जाते हैं, तो प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है और इसके बाद उस पर विस्तृत चर्चा होती है।
चर्चा के बाद सदन में मतदान कराया जाता है। यदि मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में बहुमत मिलता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि यदि 50 सांसद समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव स्वतः ही खारिज माना जाता है और उस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होती।
इस प्रस्ताव को लेकर संसद में सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है। संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने संकेत दिए हैं कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन में पेश किया जा सकता है। इसलिए सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस के सांसद Mohammed Jawed, K. Suresh और Mallikarjun Ravi ने स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव का नोटिस दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान कई विपक्षी सांसदों को बोलने से रोका गया और कुछ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित भी किया गया।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा होती है, तब वे सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। हालांकि वे सदन में मौजूद रह सकते हैं, अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान में हिस्सा भी ले सकते हैं। मतदान की स्थिति में स्पीकर सामान्य सांसदों की तरह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम का उपयोग नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें अपना वोट दर्ज कराने के लिए पर्ची का इस्तेमाल करना पड़ता है।
लोकसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव पारित होना मुश्किल है। संसद में सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए सरकार के लिए इस प्रस्ताव को गिराना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।