‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर अड़े ट्रंप, बोले- बिल पास होने तक किसी अन्य कानून पर नहीं करेंगे हस्ताक्षर
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Donald Trump News
ट्रंप ने ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास होने तक अन्य बिल साइन करने से इनकार किया।
बिल में वोटर आईडी और नागरिकता प्रमाण अनिवार्य करने का प्रस्ताव।
रिपब्लिकन समर्थन में, डेमोक्रेट्स ने बिल का विरोध किया।
Delhi / अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (8 मार्च 2026) को एक बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि जब तक ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित नहीं हो जाता, तब तक वह किसी अन्य बिल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। ट्रंप ने इस प्रस्तावित कानून को अमेरिकी चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी बताया है।
दरअसल, हाल ही में ट्रंप ने अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया और सामाजिक नीतियों में बदलाव की मांग करते हुए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ नाम का प्रस्ताव रखा है। इस बिल में मतदान से जुड़े कई सख्त नियम शामिल किए गए हैं। ट्रंप का कहना है कि इस कानून से चुनाव प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा और फर्जी मतदान की संभावना कम होगी।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए इस बिल के समर्थन में आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट स्कॉट प्रेसलर की सराहना की। उन्होंने लिखा कि स्कॉट प्रेसलर ने ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पारित कराने की बात कहकर शानदार काम किया है। ट्रंप के अनुसार यह मुद्दा करीब 88 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन हासिल कर सकता है और इसलिए इसे तुरंत पास किया जाना चाहिए।
उन्होंने साफ कहा कि यह बिल बाकी सभी विधेयकों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति के रूप में मैं तब तक किसी अन्य बिल पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा, जब तक ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित नहीं हो जाता।” उनके इस बयान ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
इस प्रस्तावित कानून के तहत मतदान के लिए मतदाता पहचान पत्र और नागरिकता का प्रमाण दिखाना अनिवार्य करने की बात कही गई है। साथ ही इस बिल में डाक द्वारा मतदान यानी मेल-इन वोटिंग को भी काफी हद तक सीमित करने का प्रस्ताव है। ट्रंप के अनुसार केवल सैन्य कर्मियों को ही डाक के माध्यम से मतदान की अनुमति दी जानी चाहिए, वह भी तब जब वे दिव्यांग हों, बीमार हों या यात्रा पर हों।
ट्रंप ने इस विधेयक को पारित कराने के लिए अमेरिकी संसद में फिलिबस्टर का उपयोग करने का सुझाव भी दिया है। ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों का समर्थन मिल रहा है और यह पिछले कुछ वर्षों में प्रतिनिधि सभा से तीन बार पारित भी हो चुका है।
हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी इस बिल का कड़ा विरोध कर रही है। डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि इस कानून से लाखों पंजीकृत मतदाताओं को परेशानी हो सकती है और इससे मतदान प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी। उनका तर्क है कि अगर कोई मतदाता अपना पता बदलता है, नाम बदलता है या किसी अन्य कारण से अपना रजिस्ट्रेशन अपडेट करना चाहता है, तो उसे नई शर्तों के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
डेमोक्रेट्स यह भी कहते हैं कि अमेरिकी संघीय कानून के तहत गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए मतदान पहले से ही गैरकानूनी है। अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उसे देश से निष्कासित भी किया जा सकता है। इसलिए नए सख्त नियमों की जरूरत नहीं है।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अमेरिका की नीतियों को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज हो गया है। ट्रंप लगातार ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दे रहे हैं।
हालांकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उनका कहना है कि अगर देश पर हमला होता है तो ईरान मजबूती से जवाब देगा। ऐसे में अमेरिकी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय हालात दोनों ही इस समय काफी संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं।