रायपुर में ACR फाइलें गायब, प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया पर संकट
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रायपुर में 45 प्राध्यापकों की ACR फाइलें गायब होने से प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया पर संकट खड़ा हो गया है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
आयुक्त संतोष कुमार देवांगन ने सचिव को पत्र लिखकर फाइलें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिससे प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जा सके।
प्राध्यापकों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है, क्योंकि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही या गंभीर अनियमितता का संकेत हो सकती है।
Raipur/ उच्च शिक्षा विभाग में सामने आए इस मामले ने पूरे प्रशासनिक ढांचे को झकझोर कर रख दिया है। जानकारी के अनुसार, प्राचार्य पदोन्नति सूची में शामिल लगभग 45 प्राध्यापकों की ACR फाइलें संचालनालय में उपलब्ध नहीं हैं। यह फाइलें उन शिक्षकों के वार्षिक कार्य मूल्यांकन का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होती हैं, जिनके आधार पर पदोन्नति का निर्णय लिया जाता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा संचालनालय के आयुक्त Dr. Santosh Kumar Devangan ने उच्च शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर इन फाइलों को जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ACR के अभाव में पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
बताया जा रहा है कि विभाग में इस समय बड़े पैमाने पर प्राचार्य पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। करीब 100 से अधिक पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित है, जिनमें ये 45 प्राध्यापक भी शामिल हैं। ऐसे में ACR फाइलों का गायब होना न केवल प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
इस घटना के सामने आने के बाद संबंधित प्राध्यापकों के बीच चिंता का माहौल है। कई प्राध्यापक इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे गंभीर अनियमितता के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेजों का एक साथ गायब होना सामान्य घटना नहीं हो सकती और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विभागीय अधिकारियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। एक ओर समय पर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने का दबाव है, तो दूसरी ओर आवश्यक दस्तावेजों की कमी से काम अटका हुआ है। इस मामले ने विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गायब ACR फाइलें कब तक मिलती हैं या विभाग कोई वैकल्पिक व्यवस्था अपनाता है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो न केवल पदोन्नति प्रक्रिया में देरी होगी, बल्कि इससे जुड़े कर्मचारियों के करियर पर भी असर पड़ सकता है।