नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव चर्चा तेज, मंत्री बनने की अटकलें बढ़ीं

Mon 20-Apr-2026,11:53 AM IST +05:30

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नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव चर्चा तेज, मंत्री बनने की अटकलें बढ़ीं Narottam-Mishra-Datia-Byelection-Politics
  • दतिया उपचुनाव को लेकर नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता बढ़ी, मंत्री बनाए जाने की अटकलों ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

  • भाजपा कोर ग्रुप में हार चुके नेताओं को शामिल कर संगठन ने अनुभव को प्राथमिकता दी, जिससे राजनीतिक रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

  • हाईकोर्ट के अलग-अलग फैसलों से ओबीसी आरक्षण पर भ्रम बढ़ा, स्पष्ट गाइडलाइन की मांग तेज हुई और उम्मीदवारों में असमंजस की स्थिति बनी।

Madhya Pradesh / Bhopal :

Bhopal/ पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। दतिया विधानसभा सीट खाली होने के बाद उनके उपचुनाव लड़ने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। यह सीट कांग्रेस के राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई है, हालांकि भारती अभी उच्च अदालत से राहत पाने की कोशिश में हैं। यदि उन्हें राहत नहीं मिलती, तो उपचुनाव तय माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि उपचुनाव से पहले नरोत्तम मिश्रा को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इससे पहले राम निवास रावत को भी उपचुनाव से पहले मंत्री बनाया गया था, हालांकि वे चुनाव हार गए थे। इसी उदाहरण को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या नरोत्तम मिश्रा के साथ भी ऐसा ही होगा या वे जीत दर्ज कर पाएंगे।

दतिया में नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता हाल के दिनों में काफी बढ़ गई है। उन्हें भाजपा के कोर ग्रुप में शामिल किया गया है, जो उनके बढ़ते प्रभाव का संकेत माना जा रहा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा उनके निवास पर जाकर मुलाकात करना भी इस बात को मजबूती देता है कि संगठन में उनकी अहम भूमिका बनी हुई है। यह भी माना जा रहा है कि उन्हें मंत्री बनाकर चुनावी समीकरण मजबूत करने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

हालांकि कांग्रेस के राजेंद्र भारती के प्रति क्षेत्र में सहानुभूति भी एक बड़ा फैक्टर बन सकती है। ऐसे में उपचुनाव नरोत्तम मिश्रा के लिए आसान नहीं माना जा रहा है।

इस बीच, भाजपा के कोर ग्रुप में शामिल कुछ ऐसे नेता भी चर्चा में हैं जो पिछला चुनाव हार चुके हैं, लेकिन संगठन में उनका प्रभाव बरकरार है। नरोत्तम मिश्रा, लालसिंह आर्य और अरविंद भदौरिया जैसे नेताओं को कोर ग्रुप में शामिल करना यह दर्शाता है कि पार्टी अनुभव और संगठनात्मक क्षमता को प्राथमिकता दे रही है।

राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रशासनिक मोर्चे पर भी हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री द्वारा कलेक्टरों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे फील्ड में सक्रिय रहें और जनप्रतिनिधियों से समन्वय बनाए रखें। इसके बावजूद निर्देशों के पालन में कमी को लेकर नाराजगी जाहिर की गई है।

वहीं, राज्यपाल द्वारा भी आदिवासी कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। बजट का सही उपयोग न होने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी को गंभीर मुद्दा बताया गया है।

इसी के साथ, ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट के अलग-अलग फैसलों ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। अलग-अलग मामलों में भिन्न निर्णय आने से उम्मीदवारों के बीच असमंजस बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट गाइडलाइन की आवश्यकता है ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति न बने।

प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और न्यायिक फैसलों के बीच बनता यह जटिल समीकरण आने वाले समय में कई बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है।