MP स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी आंदोलन, वेतन न मिलने पर हड़ताल

Mon 27-Apr-2026,01:36 PM IST +05:30

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MP स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी आंदोलन, वेतन न मिलने पर हड़ताल MP-Health-Outsource-Workers-Protest-Salary-Issue
  • मध्य प्रदेश में 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी 5-6 महीनों से वेतन न मिलने पर आंदोलन के लिए मजबूर, आर्थिक संकट गहराया।

  • 4 मई से चरणबद्ध विरोध शुरू, 18 मई को CMHO कार्यालयों पर प्रदर्शन और 25 मई से भोपाल में भूख हड़ताल की चेतावनी।

  • निजी एजेंसियों पर कमीशनखोरी और शोषण के आरोप, आंदोलन लंबा खिंचने पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका।

Chhattisgarh / Raipur :

मध्य प्रदेश/ मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों का धैर्य अब टूटता नजर आ रहा है। महीनों से वेतन न मिलने और निजी एजेंसियों की कथित मनमानी से परेशान कर्मचारियों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाया है। ‘MP संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ’ ने 4 मई से प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है, जो चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक पहुंच सकता है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष Komal Singh ने बताया कि प्रदेश के करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को पिछले 5 से 6 महीनों से वेतन नहीं मिला है। इस कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है और कई परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।

कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग करने वाली निजी एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एजेंसियां भारी कमीशनखोरी कर रही हैं और कर्मचारियों के वेतन में अनियमितता बरत रही हैं। इससे कर्मचारियों को उनका पूरा हक नहीं मिल पा रहा है और वे शोषण का शिकार हो रहे हैं।

आंदोलन की रणनीति को तीन चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में 4 मई को सभी जिला मुख्यालयों पर कर्मचारी एकत्र होकर राज्यपाल के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपेंगे। दूसरे चरण में 18 मई को प्रदेश के सभी CMHO कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।

यदि इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो तीसरे चरण में 25 मई को राजधानी भोपाल में उपमुख्यमंत्री के निवास के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।

कर्मचारी संघ का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे थे, लेकिन सरकार और विभाग की अनदेखी ने उन्हें इस कड़े कदम के लिए मजबूर कर दिया है।

इस आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। अस्पतालों में साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है, जिससे आम मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।