MP सरकार फिर लेगी 5600 करोड़ कर्ज, कुल ऋण 4.14 लाख करोड़ पार

Mon 27-Apr-2026,02:16 PM IST +05:30

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MP सरकार फिर लेगी 5600 करोड़ कर्ज, कुल ऋण 4.14 लाख करोड़ पार MP-Government-Loan-5600-Crore-Debt-Increase
  • मध्य प्रदेश सरकार 28-29 अप्रैल को 5600 करोड़ का कर्ज लेगी, अप्रैल में कुल उधारी 10,600 करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने की संभावना।

  • 3200 करोड़ 8 साल और 2400 करोड़ 22 साल के लिए कर्ज, सरकारी प्रतिभूतियों के जरिए बाजार से जुटाई जाएगी राशि।

  • कुल कर्ज 4.14 लाख करोड़ पार, विशेषज्ञों ने बढ़ते ऋण और भविष्य में ब्याज भार को लेकर चिंता जताई।

Madhya Pradesh / Bhopal :

भोपाल/ मध्य प्रदेश की मोहन सरकार एक बार फिर खुले बाजार से बड़ा कर्ज लेने जा रही है। 28 और 29 अप्रैल को सरकार 5600 करोड़ रुपए का कर्ज उठाएगी, जो दो अलग-अलग किस्तों में लिया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 में यह दूसरी बार है जब सरकार इतनी बड़ी राशि उधार लेने जा रही है। इससे पहले अप्रैल के मध्य में भी सरकार 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है, जिससे कुल उधारी का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह कर्ज सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) के जरिए बाजार से जुटाया जाएगा। इसमें 3200 करोड़ रुपए का कर्ज 8 साल की अवधि के लिए लिया जाएगा, जबकि 2400 करोड़ रुपए का कर्ज 22 साल की लंबी अवधि के लिए लिया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस कर्ज का उपयोग विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के लिए किया जाएगा। इसमें किसानों, बेरोजगारों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

हालांकि, लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर आर्थिक विशेषज्ञ चिंता भी जता रहे हैं। इस नई उधारी के बाद राज्य पर कुल कर्ज का बोझ 4 लाख 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। इससे भविष्य में ब्याज भुगतान का दबाव भी बढ़ सकता है।

इससे पहले 13 और 16 अप्रैल को भी सरकार 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। इस तरह अप्रैल महीने में ही सरकार 10,600 करोड़ रुपए से अधिक की उधारी कर चुकी है या करने जा रही है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि सरकार को विकास और जनकल्याण योजनाओं के लिए संसाधनों की जरूरत होती है, लेकिन कर्ज का बढ़ता स्तर वित्तीय संतुलन के लिए चुनौती बन सकता है।

कुल मिलाकर, राज्य सरकार की यह उधारी अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए संतुलित वित्तीय रणनीति की आवश्यकता होगी।