सतना में आवारा कुत्ते का आतंक, 3 घंटे में 40 लोग घायल, रीवा रोड में दहशत
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सतना में आवारा कुत्ते ने तीन घंटे में 40 लोगों पर हमला किया, रीवा रोड इलाके में दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते नजर आए।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी जैसे हालात बने, 25 घायलों की हालत गंभीर, एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोब्युलिन इंजेक्शन देकर इलाज किया गया।
घटना के बाद नगर निगम पर सवाल उठे, लोगों ने डॉग कंट्रोल अभियान तेज करने और आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की।
Satna/ Satna शहर में मंगलवार की शाम एक भयावह घटना ने लोगों को दहशत में डाल दिया, जब एक आवारा कुत्ते ने अचानक हिंसक रूप ले लिया और राहगीरों पर हमला करना शुरू कर दिया। महज तीन घंटों के भीतर 40 लोगों को घायल कर देने वाली इस घटना ने पूरे रीवा रोड इलाके को हिला कर रख दिया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए और कई दुकानदारों ने एहतियातन अपने शटर गिरा दिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस हमले की शुरुआत गहरानाला क्षेत्र से हुई। सफेद रंग का यह कुत्ता बेहद आक्रामक था और सामने आने वाले हर व्यक्ति को निशाना बना रहा था। गहरानाला से शुरू होकर यह माहेश्वरी स्वीट्स, खेरमाई रोड, खोवा मंडी, अस्पताल चौराहा और रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया। इस दौरान पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना के बाद जिला अस्पताल में इमरजेंसी जैसे हालात बन गए। शाम 6 बजे के बाद घायलों का आना शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहा। अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए एंटी-रेबीज इंजेक्शन कक्ष को रात 9 बजे तक खुला रखा। कुल 40 घायलों में से 25 की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी को एंटी-रेबीज वैक्सीन के साथ इम्युनोग्लोब्युलिन इंजेक्शन भी दिए गए, ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।
डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में अधिकांश की उम्र 25 से 60 वर्ष के बीच है। कई लोगों के हाथ-पैरों में गहरे घाव हैं, जहां कुत्ते ने मांस तक निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई छोटा बच्चा घायल नहीं हुआ।
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
घटना के घंटों बाद भी कुत्ते को पकड़ने में देरी ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। नागरिकों ने नगर निगम से सख्त कार्रवाई और डॉग कंट्रोल अभियान को तेज करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।