चतरा एयर एंबुलेंस हादसा: सात मौतें, सपनों का दर्दनाक अंत
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झारखंड के चतरा जिले में एयर एंबुलेंस हादसे में सात लोगों की मौत, खराब मौसम और संपर्क टूटने के बाद विमान जंगल में गिरा।
झारखंड के चतरा जिले में एयर एंबुलेंस हादसे में सात लोगों की मौत, खराब मौसम और संपर्क टूटने के बाद विमान जंगल में गिरा।
चतरा (झारखंड)/ झारखंड के चतरा जिला के सिमरिया क्षेत्र में एयर एंबुलेंस दुर्घटना ने सात लोगों की जान ले ली। रांची से दिल्ली जा रही मेडिकल इमरजेंसी फ्लाइट खराब मौसम के कारण संतुलन खो बैठी और घने जंगलों में गिरकर पूरी तरह तबाह हो गई। हादसा इतना भीषण था कि विमान में सवार पायलट, मेडिकल स्टाफ, मरीज और परिजन सभी की मौके पर ही मौत हो गई।
इस हादसे में रांची सदर अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता भी शामिल थे। मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद निवासी विकास साधारण परिवार से थे। उनके पिता ने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए जमीन बेच दी और कर्ज लिया। ओडिशा के कटक से एमबीबीएस करने के बाद वे सेवा में जुटे थे। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा घर की हालत बदलेगा, लेकिन यह सपना दुर्घटना में टूट गया। वे अपने पीछे सात साल का बेटा और शोकाकुल परिवार छोड़ गए।
फ्लाइट में गंभीर रूप से झुलसे मरीज संजय कुमार भी सवार थे, जिनका रांची में इलाज चल रहा था। बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किए जाने पर परिजनों ने करीब 7.5 से 8 लाख रुपये जुटाकर एयर एंबुलेंस बुक की थी। परिवार ने उधार और ब्याज पर रकम का इंतजाम किया था, लेकिन उड़ान मंजिल तक नहीं पहुंच सकी।
17 वर्षीय ध्रुव कुमार, जो सिमडेगा का निवासी था, भी हादसे का शिकार बना। वह पढ़ाई कर रहा था और मोबाइल इंजीनियरिंग में करियर बनाना चाहता था। अपने झुलसे मामा की देखभाल के लिए वह साथ गया था, लेकिन यह उसकी जिंदगी का अंतिम सफर बन गया।
जानकारी के अनुसार, विमान ने शाम 7:11 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी। खराब मौसम और कम दृश्यता के बीच उड़ान के 23 मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। विमान सिमरिया के करम टॉड़ जंगल में गिरा।
सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और एसएसबी की टीमों ने दुर्गम जंगल में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शवों को चार किलोमीटर पैदल निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। यह हादसा कई परिवारों के सपनों और उम्मीदों का दर्दनाक अंत बन गया।