इंदौर गांधी हॉल में डॉ. अतुल मलिकराम सम्मानित, आदिवासी समाज के उत्थान में योगदान को सराहना
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Jatra 2026
गांधी हॉल में डॉ. अतुल मलिकराम का सम्मान.
आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में योगदान.
शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर जोर.
Indore / इंदौर के ऐतिहासिक गांधी हॉल में एक गरिमामय समारोह के दौरान जनजातीय सामाजिक सेवा समिति ने राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम को आदिवासी समाज के उत्थान और कल्याण से जुड़े उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। सभागार में शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। मंच पर जब उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया गया तो तालियों की गूंज ने पूरे वातावरण को सम्मान और गौरव की भावना से भर दिया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि डॉ. मलिकराम लंबे समय से आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक भागीदारी को सशक्त बनाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनका मानना रहा है कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब उसे शिक्षा, जागरूकता और नीति-निर्माण की प्रक्रिया में बराबरी का अवसर मिले।
सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास
समिति ने विशेष रूप से उनके उन प्रयासों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से उन्होंने शिक्षा के प्रसार और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया। नीतिगत संवाद और विभिन्न मंचों पर भागीदारी के जरिए उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि आदिवासी समुदाय की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचे। उनके कार्यों ने कई युवाओं को शिक्षा और नेतृत्व की दिशा में प्रेरित किया है।
वक्ताओं ने कहा कि आज भी आदिवासी समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में जो लोग जमीनी स्तर पर काम करते हुए समुदाय को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें पहचान और प्रोत्साहन मिलना बेहद जरूरी है। इस सम्मान को भी उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया गया।
भगवान बिरसा मुंडा को नमन
सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. अतुल मलिकराम ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन किया और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान केवल उपलब्धि का प्रतीक नहीं होते, बल्कि जिम्मेदारियों को और बढ़ा देते हैं। उनके शब्दों में, आदिवासी समाज सदैव जल, जंगल और जमीन का संरक्षक रहा है और अपनी सांस्कृतिक पहचान को संजोए रखने में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आगे कहा कि आज आवश्यकता है कि समाज के संवेदनशील और प्रतिबद्ध लोग आदिवासी समुदाय के साथ खड़े हों, ताकि विकास की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में भी आदिवासी समाज के हित में हर संभव प्रयास करते रहेंगे।
सामूहिक प्रयास की आवश्यकता
कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी सामाजिक सशक्तिकरण, शिक्षा के विस्तार और समान अवसरों की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का समग्र विकास तभी संभव है जब सभी वर्गों को बराबरी का अवसर मिले और उनकी क्षमताओं को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का मंच दिया जाए।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के सम्मान समारोह केवल व्यक्तियों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज में सकारात्मक कार्यों को रेखांकित करते हैं और दूसरों को भी प्रेरणा देते हैं। गांधी हॉल में आयोजित यह कार्यक्रम इसी भावना का प्रतीक रहा, जहां सम्मान के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया।