चुनाव आयोग का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। टीम राज्य प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक कर मतदान केंद्रों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, ईवीएम और वीवीपैट की उपलब्धता, तथा मतदाता सूची के अंतिम अपडेट की समीक्षा करेगी। साथ ही आयोग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर सकता है, ताकि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके।
तमिलनाडु और पुडुचेरी के अलावा असम, केरल और पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव आयोग पहले ही असम का दौरा कर चुका है। वहां मुख्य चुनाव आयुक्त ने संकेत दिया था कि बिहू त्योहार (14 अप्रैल) के बाद ही मतदान कराया जाएगा, ताकि स्थानीय त्योहारों और सामाजिक आयोजनों पर असर न पड़े।
इन पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग तिथियों पर समाप्त हो रहा है। पश्चिम बंगाल का कार्यकाल 7 मई, तमिलनाडु का 10 मई, असम का 20 मई, केरल का 23 मई और पुडुचेरी का 15 जून को खत्म होगा। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, इन तिथियों से पहले नई विधानसभा का गठन आवश्यक है।
पिछली बार पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ था, जो अपने आप में रिकॉर्ड था। असम में दो चरणों में चुनाव संपन्न हुए थे, जबकि तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान कराया गया था। इस बार चरणों की संख्या सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए तय की जाएगी।
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग का यह दौरा चुनावी प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले दिनों में चुनाव की तारीखों का औपचारिक ऐलान भी संभव है, जिस पर सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर टिकी हुई है।