बिहार विधानसभा में बवाल: लाठीचार्ज विवाद और तीन डिसमिल जमीन की मांग पर बढ़ा सियासी टकराव
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बजट सत्र के दौरान विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन.
लाठीचार्ज के आरोपों पर न्यायिक जांच की मांग.
भूमिहीन परिवारों को तीन डिसमिल जमीन देने की मांग तेज.
Patna / बिहार विधानसभा परिसर सोमवार को एक बार फिर सियासी हलचल का केंद्र बन गया। बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों, विशेषकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए विधायक विधानसभा गेट के बाहर इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ देर के लिए माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि सुरक्षा बलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। विपक्षी नेताओं ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की अभिव्यक्ति बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे अनावश्यक हंगामा करार दिया।
विवाद की जड़ एक दिन पहले चौकीदारों के प्रदर्शन पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर है। राजद नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे लोगों पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने इसे दमनात्मक कार्रवाई बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की। साथ ही, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई गई। विपक्ष का कहना है कि यदि जनता की आवाज को इस तरह दबाया जाएगा तो यह चिंता का विषय है।
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान एक और अहम मुद्दा प्रमुखता से उभरा—भूमिहीन परिवारों को तीन डिसमिल जमीन देने की मांग। राजद विधायकों ने इसे सामाजिक न्याय का सवाल बताया। उनका कहना है कि राज्य में बड़ी संख्या में गरीब और दलित परिवार अब भी आवासीय जमीन से वंचित हैं। तीन डिसमिल जमीन मिलने से इन परिवारों को न केवल छत मिलेगी, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी मिलेगा। विपक्ष ने इसे अपने आंदोलन का मुख्य एजेंडा बनाने का संकेत दिया है।
विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई जा सकती है। उनका कहना है कि यह लड़ाई राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि गरीबों के हक के लिए है।
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो भी कदम उठाए गए, वे आवश्यक थे। सरकार ने दावा किया कि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं हुआ है और विपक्ष मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। सत्तापक्ष के नेताओं का मानना है कि बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में इस तरह का प्रदर्शन विकास से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
अब यह मामला केवल विधानसभा परिसर तक सीमित नहीं रह गया है। सदन के भीतर भी इस मुद्दे पर तीखी बहस होने के संकेत हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ आमने-सामने हैं और फिलहाल किसी भी तरह की नरमी के आसार नजर नहीं आ रहे। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति को और गरमा सकता है।
स्पष्ट है कि तीन डिसमिल जमीन की मांग और कथित लाठीचार्ज का मामला फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई समाधान निकलता है या टकराव और तेज होता है।