छत्तीसगढ़ विधानसभा में 33% महिला आरक्षण पर जोरदार टकराव

Thu 30-Apr-2026,03:43 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में 33% महिला आरक्षण पर जोरदार टकराव Chhattisgarh-Assembly-Women-Reservation-Clash-2026
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा विशेष सत्र में 33% महिला आरक्षण प्रस्ताव पेश, सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बनी।

  • विपक्ष ने सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया, कहा पहले उनके प्रस्ताव को खारिज किया गया, अब वही मुद्दा शासकीय संकल्प के रूप में लाया गया।

  • विधानसभा कार्यवाही का लाइव प्रसारण, महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव तेज, आने वाले दिनों में और बहस की संभावना।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ विशेष सत्र के पहले दिन छत्तीसगढ़ विधानसभा में भावनात्मक और राजनीतिक दोनों तरह के दृश्य देखने को मिले। कार्यवाही की शुरुआत में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पूर्व सांसद Mohsina Kidwai और पूर्व विधायक Jageshwar Bhagat के निधन की जानकारी दी। इसके बाद सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

सत्र के दौरान दर्शक दीर्घा में बैठीं महिलाओं का विशेष स्वागत किया गया। स्पीकर ने बताया कि सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर किया जा रहा है, ताकि प्रदेश की जनता अपने प्रतिनिधियों की कार्यशैली को सीधे देख सके।

राजनीतिक हलचल तब तेज हो गई जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए शासकीय संकल्प सदन में प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

हालांकि विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant ने कहा कि उनकी पार्टी पहले ही इसी विषय पर अशासकीय संकल्प ला चुकी है, जिसे स्पीकर द्वारा खारिज कर दिया गया था। उन्होंने सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

सदन में इस मुद्दे को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार पहले निंदा प्रस्ताव की बात करती है और फिर उसी विषय पर चर्चा लाकर विरोधाभासी स्थिति पैदा कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने अपने निर्णय को जनता के हित में बताया।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा का माहौल लगातार गरमाया रहा और कई बार हंगामे जैसी स्थिति भी बनी।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह की बहस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसका राजनीतिकरण भी साफ नजर आता है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर और गहन चर्चा होने की संभावना है, जिससे प्रदेश की राजनीति और अधिक गरमा सकती है।