1 मई से सुशासन तिहार: लंबित मामलों के त्वरित निपटान के निर्देश
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1 मई से शुरू हो रहा सुशासन तिहार अभियान, 30 अप्रैल तक सभी लंबित मामलों के निपटान के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश जारी।
भू-अधिकार, नामांतरण, सीमांकन और मनरेगा भुगतान जैसे अहम मुद्दों पर विशेष फोकस, ग्रामीण समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी गई।
मुख्यमंत्री करेंगे औचक निरीक्षण, एक महीने में शिकायत निवारण का लक्ष्य, बिजली और जल सुविधाओं में सुधार पर जोर।
Raipur/ “सुशासन तिहार” अभियान के तहत प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता से जुड़े लंबित मामलों का त्वरित समाधान और सरकारी सेवाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाना है। सरकार ने विशेष रूप से भू-अधिकार, नामांतरण और सीमांकन जैसे राजस्व मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि ये मुद्दे ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित रहते हैं और विवाद का कारण बनते हैं।
इसके अलावा मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान को समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने और विभिन्न प्रमाण पत्रों जैसे जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र को शीघ्र जारी करने पर जोर दिया गया है। प्रशासन को स्पष्ट निर्देश हैं कि आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और सेवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।
बिजली आपूर्ति और हैंडपंपों की मरम्मत को भी इस अभियान में शामिल किया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार हो सके। जिलों से लंबित मामलों पर नियमित रिपोर्ट मांगी जाएगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
मुख्यमंत्री द्वारा गांवों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत सामने आ सके। साथ ही सरकार ने एक महीने के भीतर प्राप्त शिकायतों के समाधान का लक्ष्य तय किया है।
यह अभियान न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाएगा, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगा। “सुशासन तिहार” के माध्यम से प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है।