राष्ट्रपति भवन में राजाजी की प्रतिमा अनावरण
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राष्ट्रपति भवन में राजाजी की प्रतिमा अनावरण, औपनिवेशिक प्रतीकों से मुक्ति और राष्ट्रीय अस्मिता सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम।
उपराष्ट्रपति ने “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” को शासन, संस्कृति और कानून में सतत परिवर्तन की प्रक्रिया बताया।
Delhi/ राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ के दौरान आज देश ने औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ते हुए एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। इस अवसर पर राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल C. Rajagopalachari (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan भी उपस्थित रहे और उन्होंने इसे औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की आजादी केवल राजनीतिक परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान में व्यापक बदलाव का सतत प्रयास है। उन्होंने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” की परिकल्पना को कई ठोस पहलों के माध्यम से साकार किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने औपनिवेशिक प्रतीकों को बदलकर राष्ट्रीय अस्मिता को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कदम उठाए हैं। राजभवनों को लोकभवनों में परिवर्तित करना, पीएमओ परिसर को ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में विकसित करना, केंद्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ रखना और औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों को निरस्त करना इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में शुरू की गई पहलों की भी सराहना की, जिनमें ‘अमृत उद्यान’ के रूप में उद्यानों को जनता के लिए खोलना, दरबार हॉल का नाम ‘गणतंत्र मंडप’ रखना और परम वीर चक्र विजेताओं की तस्वीरों को प्रमुख स्थान देना शामिल है।
राजाजी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक प्रखर वकील, स्वतंत्रता सेनानी, विचारक और लेखक थे। उन्होंने आर्थिक स्वतंत्रता और उदार नीतियों का समर्थन किया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि राजाजी का जीवन आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और उच्च चरित्र के लिए प्रेरित करता रहेगा।