छत्तीसगढ़ में पीएम आवास 2.0 को मंजूरी, 13,361 शहरी घर बनेंगे
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पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ के 6 शहरों में 13,361 किफायती आवास निर्माण को मंजूरी, EWS वर्ग को मिलेगा सीधा लाभ।
रायपुर में कोटा, सरोना, कचना सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण, स्लम पुनर्वास और बेहतर शहरी जीवन स्तर पर फोकस।
₹5.75 लाख प्रति आवास लागत, केंद्र-राज्य-लाभार्थी साझेदारी मॉडल, 36 महीने में निर्माण पूरा और पारदर्शिता के लिए RERA पंजीकरण अनिवार्य।
Raipur/ छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर आय वर्ग (EWS) के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Awas Yojana (Urban) 2.0 के तहत राज्य के छह प्रमुख शहरों में 13,361 नए आवासों के निर्माण को मंजूरी दी है। यह फैसला आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में लिया गया, जिससे शहरी गरीबों के लिए किफायती आवास का रास्ता साफ हुआ है।
इस योजना का लाभ रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, बीरगांव, रिसाली और धमतरी जैसे प्रमुख नगरीय क्षेत्रों को मिलेगा। इन शहरों में विशेष रूप से स्लम क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवास तैयार किए जाएंगे। इससे न केवल रहने की स्थिति बेहतर होगी, बल्कि शहरी जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।
राजधानी रायपुर को इस योजना में सबसे अधिक प्राथमिकता मिली है। यहां कोटा, सरोना, लाभाण्डी, शंकरनगर, मठपुरैना और कचना जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण कार्य किया जाएगा। इन क्षेत्रों में स्लम पुनर्वास और व्यवस्थित आवासीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
प्रत्येक आवास की लागत लगभग ₹5.75 लाख निर्धारित की गई है। इसमें केंद्र सरकार ₹1.50 लाख, राज्य सरकार ₹2.80 लाख और लाभार्थी ₹1.45 लाख का योगदान देंगे। इस साझेदारी मॉडल के जरिए कम लागत में गुणवत्तापूर्ण घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के तहत सभी आवासों का निर्माण 36 महीनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही टेंडर जारी करने से पहले कम से कम 50 प्रतिशत लाभार्थियों का चयन कर उनका डेटा केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी किया गया है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
आवास आवंटन में विशेष प्राथमिकता दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को दी जाएगी। उन्हें भूतल या निचले फ्लोर पर आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, सभी परियोजनाओं का Real Estate Regulatory Authority के तहत पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिससे गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
यह योजना “भागीदारी में किफायती आवास (AHP)” मॉडल पर आधारित है, जिसमें सरकार और लाभार्थी मिलकर आवास निर्माण में भागीदारी करते हैं। छत्तीसगढ़ में इस योजना की मंजूरी शहरी गरीबों के लिए बड़ी राहत है और यह राज्य में बेहतर शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।