मिजोरम की 808 ग्राम परिषदों को 15.20 करोड़, XV वित्त आयोग अनुदान जारी
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यह राशि ग्रामीण स्थानीय निकायों को बुनियादी ढांचे, स्वच्छता और स्थानीय विकास कार्यों को गति देने में मदद करेगी।
अनुदान का उपयोग वेतन पर नहीं, बल्कि संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची के विकासात्मक विषयों पर किया जाएगा।
DELHI/ केंद्र सरकार द्वारा जारी यह अनुदान मिजोरम के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) की अनुशंसा पर वित्त मंत्रालय ने यह राशि जारी की है। पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों को दिए जाने वाले अनुदान हर वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं, ताकि योजनाओं के कार्यान्वयन में निरंतरता बनी रहे।
इस बार जारी 15.20 करोड़ रुपये की राशि अप्रतिबंधित अनुदान की श्रेणी में आती है। इन अनुदानों का उपयोग ग्राम परिषदें संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों के अंतर्गत अपनी स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर सकती हैं। हालांकि, इन निधियों का उपयोग वेतन या अन्य स्थापना लागतों पर नहीं किया जा सकता, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राशि सीधे विकासात्मक कार्यों में ही लगे।
इसके अतिरिक्त, पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत बद्ध (टाइड) अनुदानों का भी प्रावधान है, जिनका उपयोग मुख्य रूप से बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने के लिए किया जाता है। इनमें स्वच्छता, खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति को बनाए रखना, घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन, मानव मल एवं मल कीचड़ प्रबंधन जैसी गतिविधियां शामिल हैं। साथ ही, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसे कार्यों पर भी इन अनुदानों से खर्च किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से मिजोरम की ग्राम परिषदें स्थानीय स्तर पर बेहतर योजना बना सकेंगी, ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा और स्वच्छता व जल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जा सकेगी। यह कदम ग्रामीण सशक्तिकरण और विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।