CSIR ने बनाया रिकॉर्ड, समय से पहले खाते जमा और डिजिटल सिस्टम लॉन्च

Thu 02-Apr-2026,04:20 PM IST +05:30

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CSIR ने बनाया रिकॉर्ड, समय से पहले खाते जमा और डिजिटल सिस्टम लॉन्च CSIR-Accounts-Early-Submission-Digital-Software
  • CSIR ने लगातार तीसरे वर्ष समय सीमा से पहले वार्षिक खाते CAG को सौंपकर वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता में नया मानक स्थापित किया।

  • CSIR ने CPS सॉफ्टवेयर लॉन्च कर खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और केंद्रीकृत बनाया, डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम।

Delhi / New Delhi :

Delhi/ CSIR ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। संस्था ने न केवल नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन ही अपने वार्षिक खातों को तैयार किया, बल्कि उन्हें निर्धारित समय सीमा 30 जून से लगभग तीन महीने पहले CAG को प्रस्तुत कर दिया।

यह लगातार तीसरा वर्ष है जब CSIR ने समय से पहले अपने खातों को तैयार कर पेश किया है। इस उपलब्धि को वित्तीय प्रबंधन, सुशासन और जवाबदेही के क्षेत्र में एक मिसाल माना जा रहा है।

इस सफलता के पीछे CSIR द्वारा विकसित ‘अकाउंट्स मैनेजर सॉफ्टवेयर’ (AMS) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह सॉफ्टवेयर CSIR मुख्यालय और देशभर में स्थित इसकी 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में लागू किया गया है, जिससे वित्तीय प्रक्रियाएं अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनी हैं।

इस पहल को सफल बनाने में डॉ. एन. कलाइसेल्वी के मार्गदर्शन और चेतन प्रकाश जैन के नेतृत्व में काम करने वाली टीम का अहम योगदान रहा है।

CSIR ने डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 1 अप्रैल 2026 को ‘CSIR परचेज सॉफ्टवेयर’ (CPS) भी लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म खरीद प्रक्रिया को केंद्रीकृत, पारदर्शी और अधिक कुशल बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से खरीद प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और गति सुनिश्चित की जाएगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। CSIR की ये पहलें भारत सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि CSIR द्वारा विकसित ये डिजिटल सिस्टम अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकते हैं। इससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में सुधार और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलने की संभावना है।