कृषि अपशिष्ट से बनेगी सोडियम बैटरी, भारत ने दी बड़ी टेक्नोलॉजी बढ़त

Thu 02-Apr-2026,04:11 PM IST +05:30

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कृषि अपशिष्ट से बनेगी सोडियम बैटरी, भारत ने दी बड़ी टेक्नोलॉजी बढ़त India-Sodium-ION-Battery-Agri-Waste-Technology
  • भारत में सोडियम-आयन बैटरी तकनीक को बढ़ावा, कृषि और जैव अपशिष्ट से हार्ड कार्बन विकसित कर ऊर्जा भंडारण में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य।

  • TDB की वित्तीय सहायता से स्वदेशी बैटरी सामग्री का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम और टिकाऊ ऊर्जा समाधान मजबूत होंगे।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड द्वारा समर्थित यह परियोजना देश में उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य सोडियम-आयन बैटरी के लिए आवश्यक एनोड सामग्री के रूप में उपयोग होने वाले हार्ड कार्बन का स्वदेशी उत्पादन और व्यावसायीकरण करना है।

यह परियोजना विशेष रूप से जैव-अपशिष्ट और कृषि अवशेषों के उपयोग पर केंद्रित है। इन संसाधनों से तैयार हार्ड कार्बन न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह आयातित कच्चे माल पर निर्भरता को भी कम करेगा। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।

सोडियम-आयन बैटरियां पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही हैं। खासतौर पर ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण, यूपीएस सिस्टम, सौर स्ट्रीट लाइटिंग और कम गति वाले इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे ई-रिक्शा, ई-स्कूटर और ई-साइकिल में इनका उपयोग बढ़ने की संभावना है।

हार्ड कार्बन, सोडियम-आयन बैटरियों के लिए एक महत्वपूर्ण एनोड सामग्री है, जो उच्च प्रारंभिक दक्षता, स्थिर प्रदर्शन और बेहतर ऊर्जा भंडारण क्षमता प्रदान करता है। इसकी संरचना उच्च तापमान पर भी स्थिर रहती है, जिससे यह लंबे समय तक उपयोग के लिए उपयुक्त बनता है।

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह ‘वेस्ट टू वैल्यू’ यानी अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने की अवधारणा को बढ़ावा देती है। कृषि और जैव अपशिष्ट का उपयोग कर न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों के लिए भी अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों का विकास बेहद जरूरी है। उन्होंने इस परियोजना को आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम की दिशा में एक अहम कदम बताया।

कंपनी के प्रतिनिधियों ने भी इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और बाजार में स्वदेशी बैटरी सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।