AIIA की 10 साल की उपलब्धि: आयुर्वेद से 37.74 लाख मरीजों को मिली स्वास्थ्य सेवाएं
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All India Institute of Ayurveda
AIIA ने 10 वर्षों में 37.74 लाख से अधिक मरीजों को सेवाएं दीं।
नई दिल्ली के मुख्य परिसर में 30 लाख से अधिक मरीजों का उपचार हुआ।
कोविड-19 के बाद आयुर्वेद के प्रति लोगों की रुचि में वृद्धि दर्ज की गई।
New Delhi / क्या आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है? नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की दस साल की रिपोर्ट में मरीजों से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आखिर संस्थान ने एक दशक में कितने लोगों तक उपचार पहुंचाया?
भारत में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान यानी AIIA ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर एक दशक की उपलब्धियों और मरीजों को दी गई स्वास्थ्य सेवाओं पर आधारित रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2016 से सितंबर 2026 के बीच संस्थान के मुख्य परिसर और विभिन्न संबद्ध एवं आउटरीच केंद्रों में कुल 37 लाख 74 हजार 524 मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं।
यह आंकड़ा आयुर्वेद आधारित चिकित्सा सेवाओं तक लोगों की पहुंच और संस्थान के विस्तारित स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क को दर्शाता है।
सबसे पहले बात करते हैं नई दिल्ली के सरिता विहार स्थित AIIA के मुख्य परिसर की। रिपोर्ट के अनुसार, यहां पिछले दस वर्षों में 30 लाख 37 हजार 77 मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। संस्थान में प्रतिदिन लगभग तीन हजार मरीजों को ओपीडी सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता है। इसके अलावा, 200 बिस्तरों वाला इनडोर रोगी विभाग यानी IPD भी है, जहां भर्ती होकर उपचार कराने वाले मरीजों की देखभाल की जाती है।
संस्थान ने केवल दिल्ली तक अपनी सेवाएं सीमित नहीं रखीं, बल्कि विभिन्न केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार भी किया। इनमें गोवा स्थित सैटेलाइट सेंटर के साथ सफदरजंग अस्पताल, यूपीएससी भवन, झज्जर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, मसूरी का आईएएस प्रशिक्षण केंद्र और केवड़िया के एकता नगर स्थित केंद्र शामिल हैं।
इन संबद्ध और आउटरीच केंद्रों के जरिए लगभग सात लाख 37 हजार मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। इससे संस्थान के स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क की पहुंच और व्यापक हुई है।
अब बात करते हैं मरीजों की संख्या में हुई वृद्धि की। AIIA के निदेशक प्रोफेसर वैद्य पी. के. प्रजापति के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद आयुर्वेद के प्रति लोगों की रुचि और स्वीकार्यता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में संस्थान ने लगभग एक लाख 23 हजार मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की थीं। वहीं, सितंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर पांच लाख 40 हजार से अधिक हो गई। यानी रिपोर्ट के अनुसार, मरीजों की संख्या में चार गुना से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, यह वृद्धि संस्थान में मरीजों की संख्या को दर्शाती है। इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी विशेष आयुर्वेदिक उपचार की प्रभावकारिता कितनी है। इसके लिए अलग से वैज्ञानिक अनुसंधान और चिकित्सकीय प्रमाण महत्वपूर्ण हैं।
संस्थान के स्थापना दिवस पर दशकभर की उपलब्धियों की रिपोर्ट जारी करने के साथ कौमारकॉन-2026 का आयोजन भी किया गया। इन पहलों के जरिए व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
गौरतलब है कि अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद में उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाओं, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है।
कुल मिलाकर, दस वर्षों में 37 लाख से अधिक मरीजों तक पहुंचना AIIA के स्वास्थ्य सेवा विस्तार का महत्वपूर्ण आंकड़ा है। आने वाले समय में वैज्ञानिक अनुसंधान, उपचार की गुणवत्ता और मरीजों की जरूरतों के अनुरूप सेवाओं का विकास इसकी भूमिका को और महत्वपूर्ण बना सकता है।
ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए देखते रहिए AGCNN NEWS। नमस्कार!