Skin Disease Treatmen | त्वचा रोगों के इलाज के लिए आयुष मंत्रालय के नए दिशानिर्देश जारी, जानें क्या बदलेगा?

Tue 13-Oct-2026,11:55 PM IST +05:30

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Skin Disease Treatmen | त्वचा रोगों के इलाज के लिए आयुष मंत्रालय के नए दिशानिर्देश जारी, जानें क्या बदलेगा? Skin Disease Treatmen
  • आयुष मंत्रालय ने त्वचा रोगों के प्रबंधन के लिए नए मानक उपचार दिशानिर्देश जारी किए।

  • आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, होम्योपैथी और योग को पहल में शामिल किया गया।

  • दिशानिर्देशों का उद्देश्य उपचार में गुणवत्ता, एकरूपता और साक्ष्य-आधारित अभ्यास को बढ़ावा देना है।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / सोरायसिस, सफेद दाग, खुजली और त्वचा की दूसरी समस्याओं के इलाज में अब क्या बदलने जा रहा है? आयुष मंत्रालय ने नई पहल की है, जिसमें आयुर्वेद से होम्योपैथी तक उपचार के मानक दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

त्वचा संबंधी बीमारियों के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आयुष मंत्रालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी प्रणालियों के माध्यम से त्वचा विकारों के प्रबंधन के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश यानी एसटीजी जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों में योग को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य उपचार में एकरूपता, गुणवत्ता आश्वासन और साक्ष्य-आधारित नैदानिक अभ्यास को बढ़ावा देना है।

ये दिशानिर्देश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के आयुष विभाग द्वारा तैयार किए गए हैं। इन्हें 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किया गया। मंत्रालय का मानना है कि इन दिशानिर्देशों से आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ढांचे के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद मिलेगी।

किन त्वचा रोगों के लिए तैयार किए गए दिशानिर्देश?
इन मानक दिशानिर्देशों में सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, विटिलिगो यानी सफेद दाग, पित्ती और डर्मेटोफाइटोसिस जैसे सामान्य त्वचा विकारों को शामिल किया गया है। प्रत्येक आयुष प्रणाली के लिए इन स्थितियों की रोकथाम, निदान, उपचार, अनुवर्ती देखभाल और पुनर्वास से संबंधित विशिष्ट सुझाव दिए गए हैं।

आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि ये दिशानिर्देश सामान्य त्वचा रोगों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और समग्र देखभाल को प्रोत्साहित करने में सहायक होंगे। उन्होंने बताया कि इनका उद्देश्य संबंधित आयुष प्रणालियों के चिकित्सकीय दृष्टिकोण को समकालीन वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ना है।

उनके अनुसार, मानकीकृत और साक्ष्य-आधारित नैदानिक अभ्यास से रोगियों की देखभाल में सुधार लाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य में आयुष प्रणालियों की भूमिका मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों की सलाह से तैयार हुए दिशानिर्देश
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इसे मानकीकरण और साक्ष्य-आधारित उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के परामर्श, शास्त्रीय ग्रंथों की समीक्षा और आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों के मूल्यांकन के आधार पर ये दिशानिर्देश विकसित किए गए हैं।

इस प्रक्रिया में आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के वरिष्ठ अकादमिक विशेषज्ञों, योग विशेषज्ञों तथा आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों ने योगदान दिया। आयुष अनुसंधान परिषदों की तकनीकी विशेषज्ञता भी ली गई। दिशानिर्देश तैयार करते समय प्रत्येक आयुष प्रणाली के मूल सिद्धांतों को बनाए रखने पर जोर दिया गया।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने भी त्वचा संबंधी देखभाल में बहुविषयक सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यह पहल चिकित्सकों को सुरक्षित, प्रभावी और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं देने में सहायता कर सकती है।

वास्तविक परिस्थितियों में भी किया गया परीक्षण
इन दिशानिर्देशों की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनका क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन है। आयुष विभाग ने दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के साथ मिलकर प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के साथ प्रोटोकॉल का परीक्षण किया।

इस प्रक्रिया के दौरान चिकित्सकों से मिली प्रतिक्रिया को अंतिम दस्तावेजों में शामिल किया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दिशानिर्देश केवल सैद्धांतिक न रहें, बल्कि वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में भी उपयोगी साबित हों।

मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था को क्या लाभ मिल सकता है?
मंत्रालय को उम्मीद है कि इन दिशानिर्देशों से चिकित्सकों को उपचार संबंधी निर्णय लेने, प्रशिक्षण, शिक्षा और आगे के अनुसंधान में सहायता मिलेगी। ये आयुष चिकित्सकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए संदर्भ दस्तावेज के रूप में भी काम कर सकते हैं।

हालांकि, दिशानिर्देश जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक उपचार हर मरीज के लिए समान रूप से प्रभावी होगा। त्वचा रोगों के लक्षण और गंभीरता अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए मरीजों को योग्य चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से भी परामर्श लेना चाहिए।

कुल मिलाकर, आयुष मंत्रालय की यह पहल त्वचा संबंधी विकारों के प्रबंधन में मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन दिशानिर्देशों का वास्तविक लाभ उनके उचित क्रियान्वयन, वैज्ञानिक मूल्यांकन और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगा।