Alzheimer Test | क्या Blood Test से अल्जाइमर का पता चलेगा? इंदौर में अल्जाइमर की समय से पहले हो सकेगी पहचान
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Alzheimer Test Madhya Pradesh
अल्जाइमर की शुरुआती पहचान के लिए नया ब्लड बायोमार्कर टेस्ट लॉन्च किया गया।
टेस्ट pTau217 और Aβ42 जैसे महत्वपूर्ण बायोमार्कर्स की जांच करता है।
K2 EDTA प्लाज्मा सैंपल से जांच और 24 घंटे में परिणाम मिलने का दावा है।
Indore / अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी की समय रहते पहचान और रोकथाम की दिशा में इंदौर में एक नई जांच सुविधा शुरू की गई है। संपूर्ण सोडानी डायग्नोस्टिक क्लिनिक ने अल्जाइमर की शुरुआती पहचान के लिए ब्लड बायोमार्कर टेस्ट लॉन्च किया है। दावा है कि इस जांच के जरिए अल्जाइमर से जुड़े मस्तिष्कीय बदलावों का पता याददाश्त कमजोर होने जैसे स्पष्ट लक्षण सामने आने से कई वर्ष पहले लगाया जा सकता है। इससे मरीजों को आगे की चिकित्सकीय जांच और उपचार की दिशा में समय रहते कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
अल्जाइमर डिमेंशिया के प्रमुख कारणों में शामिल बीमारी है। इसकी पहचान अक्सर उस समय होती है, जब व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर असर दिखाई देने लगता है। ऐसे में बीमारी से जुड़े बदलावों की शुरुआती पहचान को चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है।
अब तक अल्जाइमर से जुड़े बदलावों की जांच के लिए सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड यानी सीएसएफ टेस्ट और एमिलॉयड पीईटी स्कैन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। सीएसएफ जांच के लिए स्पाइनल टैप की प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, जबकि एमिलॉयड पीईटी स्कैन और सीएसएफ जांच दोनों अपेक्षाकृत महंगी प्रक्रियाएं हैं और हर स्थान पर आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं। क्लिनिक के अनुसार, इंदौर में फिलहाल अल्जाइमर के लिए एमिलॉयड पीईटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिवारों को जांच के लिए अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ सकता है।
संपूर्ण हेल्थकेयर के प्रवक्ता के मुताबिक नया ब्लड टेस्ट इस दिशा में आसान विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास है। उनके अनुसार, कम तकलीफ वाली ब्लड जांच से बीमारी से जुड़े संकेतों की पहचान होने पर मरीज और परिवार चिकित्सकों के साथ मिलकर आगे की जांच, उपचार और भविष्य की स्वास्थ्य योजना को लेकर समय पर निर्णय ले सकते हैं।
यह ऑटोमेटेड टेस्ट अल्जाइमर से जुड़े दो प्रमुख बायोमार्कर्स pTau217 और Aβ42 की जांच करता है। ये दोनों बायोमार्कर्स अल्जाइमर से संबंधित मस्तिष्कीय बदलावों की पहचान में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस जांच के लिए K2 EDTA प्लाज्मा सैंपल की जरूरत होती है और क्लिनिक के अनुसार परिणाम 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराए जाते हैं।
यह टेस्ट विशेष रूप से 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों, शुरुआती याददाश्त संबंधी परेशानी या कॉग्निटिव डिक्लाइन महसूस करने वाले लोगों, परिवार में अल्जाइमर या डिमेंशिया का इतिहास रखने वालों और चिकित्सक द्वारा कॉग्निटिव असेसमेंट की सलाह दिए गए मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है।
संपूर्ण हेल्थकेयर के अनुसार, डायग्नोस्टिक्स के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक के अनुभव के साथ संस्थान मध्य भारत में आधुनिक जांच तकनीकों को उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। हालांकि, किसी भी बायोमार्कर टेस्ट के परिणामों की चिकित्सकीय व्याख्या डॉक्टर की सलाह और आवश्यक अन्य जांचों के साथ की जानी चाहिए। शुरुआती जांच बीमारी से जुड़े जोखिम या बदलावों को समझने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे अपने आप में अंतिम निदान नहीं माना जाना चाहिए।