छत्तीसगढ़ विधानसभा में धान भंडारण पर विवाद, विपक्षी विधायक निलंबित
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विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई जिलों में धान चूहों द्वारा नष्ट हो रहा है, जबकि सरकार ने इसे पूरी तरह गलत बताया।
हंगामे के बीच कांग्रेस के कुछ विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंचे, जिन्हें निलंबित कर दिया गया।
Raipur/ छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में धान भंडारण को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए दावा किया कि प्रदेश में खरीदा गया धान उचित भंडारण केंद्रों में सुरक्षित नहीं रखा गया और कई स्थानों पर चूहों द्वारा धान नष्ट होने की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से उत्पन्न यह धान यदि सुरक्षित नहीं रहेगा तो यह सरकार की बड़ी विफलता होगी।
विपक्षी विधायकों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। विधायक उमेश पटेल ने बताया कि कई जिलों से धान नष्ट होने की खबरें आ रही हैं, जिससे किसानों और सरकारी खजाने दोनों को नुकसान हो सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि 22 लाख 71 हजार क्विंटल धान अभी तक जमा नहीं हुआ और सरकार जिम्मेदारी से बचने के लिए चूहों को दोष दे रही है।
सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया। खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 25 लाख किसानों से 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और इसके लिए 46,277 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल 67 हजार टन धान संग्रहण केंद्रों में सुरक्षित है और चूहों द्वारा नष्ट होने की बात पूरी तरह गलत है।
स्थगन प्रस्ताव को सभापति ने अग्राह्य घोषित किया। इसके बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह में प्रवेश कर विरोध प्रदर्शन करने लगे। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कांग्रेस के प्रदर्शनकारी विधायकों को निलंबित कर दिया गया। इस घटना से स्पष्ट होता है कि धान भंडारण और किसानों के हितों की सुरक्षा प्रदेश की राजनीति में गंभीर मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।