हर्षानंदगिरी का पलटवार, संन्यास विवाद पर बोलीं- यह ईर्ष्या और टीआरपी
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हर्षानंदगिरी ने संन्यास विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ईर्ष्या और टीआरपी का खेल बताया, कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से अपमान सह रही हैं।
अनिलानंद महाराज की टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए “नचनिया” शब्द के इस्तेमाल को अपमानजनक बताया और इसे छवि खराब करने की कोशिश कहा।
संन्यास और पूर्व जीवन को लेकर उठे सवालों के बीच हर्षानंदगिरी ने स्पष्ट किया कि वे अपने आध्यात्मिक मार्ग पर अडिग हैं और पीछे नहीं हटेंगी।
Raipur/ राजधानी में संत समाज के भीतर संन्यास और अतीत को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। Harshanandgiri ने अपने खिलाफ उठ रहे सवालों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरा विवाद ईर्ष्या और टीआरपी हासिल करने की कोशिश का हिस्सा है। उनके इस बयान के बाद संत समाज और सोशल मीडिया दोनों जगह बहस और तेज हो गई है।
हर्षानंदगिरी ने कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से लगातार व्यक्तिगत हमलों और अपमान का सामना कर रही हैं। उन्होंने इसे अपनी “अग्निपरीक्षा” बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन संभव है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी संत जन्म से ही संत होते हैं? समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां लोग अपने जीवन में बदलाव कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाते हैं।
उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जबकि समाज में कई ऐसे लोग हैं जिनका अतीत विवादों से भरा रहा है। इसके बावजूद उनके संन्यास पर सवाल उठाना दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
Anilanand Maharaj द्वारा की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए हर्षानंदगिरी ने नाराजगी जताई। उन्होंने “नचनिया” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह केवल उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि उनकी पहचान पहले से ही देश-विदेश में रही है और इस तरह के बयान केवल चर्चा बटोरने के लिए दिए जा रहे हैं।
संन्यास को लेकर समाज की प्रतिक्रिया पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कोई लड़की धर्म परिवर्तन कर शादी करती है तो उसका विरोध होता है, और जब उन्होंने संन्यास लिया तो भी विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह विरोधाभास समाज की सोच को दर्शाता है।
इस पूरे विवाद की जड़ उनके संन्यास और पूर्व जीवन को लेकर उठे सवाल हैं, जिनके चलते यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। हालांकि, हर्षानंदगिरी ने साफ कर दिया है कि वे अपने आध्यात्मिक मार्ग पर अडिग हैं और किसी भी आलोचना से विचलित नहीं होंगी।