बस्तर में 108 माओवादी करेंगे आत्मसमर्पण
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बस्तर संभाग में ‘पूना मारगेम’ अभियान के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 108 माओवादी कैडर जगदलपुर में सामूहिक आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होंगे।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिले खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों ने कई जिलों में बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है।
Chhattisgarh/ Bastar division में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता मिलने जा रही है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त पहल ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत Dandakaranya Special Zonal Committee के 108 माओवादी कैडर हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने वाले हैं। यह सामूहिक आत्मसमर्पण कार्यक्रम Jagdalpur स्थित बस्तर रेंज मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा, जहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों से मिली जानकारी और खुफिया इनपुट के आधार पर नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने बस्तर रेंज के कई जिलों में कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। इनमें आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक शामिल हैं, जिन्हें कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित भी किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े रहे हैं और लंबे समय से बस्तर क्षेत्र में सक्रिय थे। पुलिस का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे अभियान और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण अब बड़ी संख्या में माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हो रहे हैं।
इसी कार्यक्रम में Kanker district में सक्रिय तीन नक्सली भी आत्मसमर्पण करेंगे। इनमें दो डीवीसीएम रैंक के माओवादी शामिल बताए जा रहे हैं। ये तीनों नक्सली अपने साथ तीन AK-47 राइफल भी पुलिस को सौंपेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
पुलिस के अनुसार इस आत्मसमर्पण के बाद कांकेर जिले में सक्रिय हथियारबंद नक्सलियों की संख्या घटकर करीब 21 रह जाएगी। प्रशासन ने 31 मार्च से पहले कांकेर को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है और इसके लिए अभियान को और तेज कर दिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के अनुसार आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और समाज में पुनर्स्थापन की सुविधा दी जाती है। इसी वजह से कई माओवादी संगठन छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।