यूक्रेन युद्ध में मारे गए हरियाणा युवक का शव गांव पहुंचा
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रेवाड़ी के काठुवास गांव में रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए युवक अंशु का शव पहुंचा, परिवार ने नम आंखों से अंतिम संस्कार किया।
रूस में फंसे भारतीय युवाओं का मुद्दा गंभीर, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, 24 अप्रैल को सुनवाई, परिजन सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।
रेवाड़ी जिले के गांव काठुवास में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए युवक अंशु का शव शुक्रवार को गांव पहुंचा। परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी। बड़े भाई मोहित ने चिता को मुखाग्नि दी। अंशु एमबीए की पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन हालात ऐसे बने कि वह रूसी सेना में भर्ती हो गया और युद्ध में उसकी जान चली गई।
परिजनों के अनुसार, अंशु अगस्त माह में रूस में सेना में शामिल हुआ था। 14 अक्टूबर 2025 को यूक्रेन में लड़ाई के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार के साथ उसकी आखिरी बातचीत 18 अगस्त को हुई थी, जिसमें उसने अपने पिता राकेश कुमार को बताया था कि वह वहां बुरी तरह फंस चुका है और कुछ समय तक संपर्क नहीं हो पाएगा। इसके बाद परिवार उसके फोन का इंतजार करता रहा, लेकिन बाद में उसकी मौत की सूचना मिली।
4 अप्रैल को भारतीय दूतावास की ओर से परिवार को जानकारी दी गई कि अंशु का शव मिल चुका है और उसे भारत भेजा जा रहा है। 17 अप्रैल को उसका पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से परिवार ने औपचारिकताएं पूरी कर शव को गांव लाया और अंतिम संस्कार किया।
अंशु अपने परिवार में सबसे छोटा था। उसकी मां का पहले ही निधन हो चुका है, और अब परिवार के पास उसकी यादें ही शेष रह गई हैं। इस घटना ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारतीय युवाओं के फंसने का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, रूस ने अगस्त 2024 में करीब 110 भारतीय युवाओं को सेना में शामिल किया था। इनमें से कई को वापस लाया गया, लेकिन कुछ अब भी लापता हैं और कई की मौत हो चुकी है। हरियाणा के भी कई युवक इस संकट से प्रभावित हुए हैं।
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिस पर 24 अप्रैल को सुनवाई होनी है। परिजन सरकार से हस्तक्षेप कर फंसे युवाओं को सुरक्षित वापस लाने की मांग कर रहे हैं।