छत्रपति हत्याकांड: हाई कोर्ट ने डेरा मुखी को बरी
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कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के खिलाफ अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को कायम रखा।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने छत्रपति हत्याकांड में डेरा मुखी को बरी करते हुए अन्य तीन आरोपियों की उम्रकैद बरकरार रखी।
Punjab Haryana/ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शनिवार सुबह छत्रपति हत्याकांड में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने डेरा मुखी को मामले से बरी करते हुए स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य उनके खिलाफ अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। डेरा मुखी के खिलाफ लगाए गए आरोपों में संदेह होने के कारण उन्हें राहत दी गई।
वहीं, अन्य तीन आरोपियों कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया। अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य और गवाहियों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित होती है। इस फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया कि हाई कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी के मामले में सबूतों की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग निर्णय लिया।
इस हत्याकांड की पृष्ठभूमि 2002 की है, जब पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या उनके अखबार में डेरा से जुड़े गंभीर आरोप प्रकाशित करने के कारण कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैलाई थी। प्रारंभिक जांच के बाद यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई की विशेष अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से विस्तृत बहस हुई। अदालत ने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने डेरा मुखी की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत पेश नहीं किए।
फैसले के बाद कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता और प्रमाणों के महत्व को दर्शाता है। डेरा मुखी के समर्थक इस फैसले को बड़ी राहत मान रहे हैं, जबकि कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के खिलाफ उम्रकैद बरकरार रहने से मामले में संवेदनशीलता बनी हुई है।