बालोद जंबूरी टेंडर पर विधानसभा में घमासान

Wed 11-Mar-2026,01:38 PM IST +05:30

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बालोद जंबूरी टेंडर पर विधानसभा में घमासान Balod-Jamboree-Tender-Row-Chhattisgarh-Assembly
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बालोद जंबूरी कार्यक्रम के खर्च और टेंडर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

  • स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी टेंडर जेम पोर्टल के माध्यम से नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से जारी किए गए।

Chhattisgarh / Balod :

BALOD/ Chhattisgarh Legislative Assembly के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में बालोद में आयोजित स्काउट-गाइड रोवर-रेंजर जंबूरी कार्यक्रम को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। कार्यक्रम के टेंडर और खर्च से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी विधायकों ने सरकार से कई सवाल पूछे। इस दौरान कुछ समय के लिए सदन का माहौल गरमा गया और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।

प्रश्नकाल के दौरान Umesh Patel ने सरकार से जंबूरी कार्यक्रम में हुए खर्च और टेंडर प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि कार्यक्रम के आयोजन में किन-किन कार्यों पर कितना खर्च किया गया और सामग्रीवार खर्च का पूरा विवरण क्या है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किन कंपनियों को टेंडर दिया गया और टेंडर की शर्तें तय करने के लिए क्या किसी समिति का गठन किया गया था।

उमेश पटेल ने यह भी पूछा कि क्या सरकार को ऐसी कोई शिकायत मिली है जिसमें आरोप लगाया गया हो कि किसी खास फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसी शिकायतें हैं तो उनकी जांच कराई जानी चाहिए।

इस पर जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने लिखित जानकारी सदन में पेश की। उन्होंने बताया कि जंबूरी कार्यक्रम के आयोजन के दौरान एरीना निर्माण, शौचालय, पेयजल, बिजली, ध्वनि व्यवस्था, टेंट, डोम, बैरिकेडिंग, भोजनालय और प्रिंटिंग जैसे कार्यों पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए गए। मंत्री ने यह भी बताया कि आयोजन से जुड़े कई कार्यों के लिए रायपुर की एक फर्म को लगभग 5 करोड़ 18 लाख रुपये का टेंडर दिया गया था।

विपक्ष ने इस दौरान आरोप लगाया कि जंबूरी स्थल पर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था। उमेश पटेल ने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर कई संरचनाएं पहले से तैयार दिखाई दे रही थीं, जिससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच विधानसभा की उच्च स्तरीय समिति से कराने की मांग की।

इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि स्काउट-गाइड परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद पहले से अदालत में चल रहा है। बघेल ने आरोप लगाया कि जंबूरी आयोजन के लिए टेंडर प्रक्रिया में कई बार बदलाव किए गए और जिस फर्म को काम मिला उसे पहले से जानकारी होने की आशंका है।

हालांकि मंत्री गजेंद्र यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जंबूरी आयोजन की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार की गई है। उन्होंने बताया कि सभी टेंडर Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल के माध्यम से जारी किए गए, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। मंत्री ने कहा कि जब किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है तो जांच की आवश्यकता नहीं है।