लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर घमासान

Tue 10-Mar-2026,04:24 PM IST +05:30

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  • विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे 50 से अधिक सांसदों के समर्थन के बाद चर्चा के लिए स्वीकार किया गया।

  • बहस के दौरान डिप्टी स्पीकर पद खाली होने का मुद्दा भी उठा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवैधानिक और संसदीय नियमों को लेकर टकराव हुआ।

Delhi / New Delhi :

Delhi/ संसद के बजट सत्र के दौरान New Delhi में एक दुर्लभ संसदीय घटनाक्रम सामने आया, जब विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद Mohammad Jawed ने सदन में रखा, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ। आवश्यक समर्थन मिलने के बाद लोकसभा ने प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इस पर चर्चा की अनुमति दे दी।

इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सदन में लगभग 10 घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर का रवैया निष्पक्ष नहीं रहा और कई अवसरों पर विपक्षी सांसदों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिला।

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होते ही सदन में अध्यक्षता को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। विपक्षी सांसदों ने सवाल उठाया कि बहस के दौरान Jagadambika Pal को चेयर पर बैठाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। इस पर पाल ने स्पष्ट किया कि स्पीकर कार्यालय को यह अधिकार है कि वह चेयरपर्सन पैनल के किसी भी सदस्य को सदन की कार्यवाही संचालित करने के लिए नामित कर सकता है।

बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi के बीच भी जोरदार बहस हुई। अमित शाह ने कहा कि स्पीकर का पद संवैधानिक रूप से निरंतर सक्रिय रहता है और सदन भंग होने की स्थिति में भी समाप्त नहीं होता। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया।

वहीं गौरव गोगोई ने कहा कि सदन में विपक्ष को बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता और कई बार उनके माइक्रोफोन बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत बताया।

चर्चा के दौरान डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली होने का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस नेता K. C. Venugopal ने कहा कि यदि डिप्टी स्पीकर का पद भरा होता तो अध्यक्षता को लेकर इस तरह का विवाद उत्पन्न नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर इस पद को खाली रखा है।

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और भाजपा सांसद Nishikant Dubey ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद खाली होने की स्थिति में चेयरपर्सन पैनल का कोई भी सदस्य सदन की कार्यवाही संचालित कर सकता है।

स्पीकर को हटाने का यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के Article 94 of the Constitution of India के तहत लाया गया है। इसके अनुसार स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वह स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करते।

भारत के संसदीय इतिहास में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना बेहद दुर्लभ माना जाता है। स्वतंत्र भारत में यह केवल तीसरी बार है जब इस प्रकार का औपचारिक प्रस्ताव लाया गया है, जिससे इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।