मिडिल ईस्ट युद्ध का असर: छत्तीसगढ़ टूरिज्म को 50 करोड़ का नुकसान
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Middle-East-War-Impact-Chhattisgarh-Tourism
यदि युद्ध की स्थिति मई-जून तक जारी रही तो समर वेकेशन के दौरान छत्तीसगढ़ के ट्रैवल कारोबार को करीब 200 करोड़ रुपये तक नुकसान हो सकता है।
सुरक्षा चिंताओं के चलते विदेश यात्रा की करीब 30 प्रतिशत बुकिंग रद्द हुईं, जिससे टूरिज्म उद्योग और एयरलाइन सेक्टर पर असर पड़ा।
Raipur/ मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सैन्य हमलों के कारण वैश्विक यात्रा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। United States और Israel द्वारा Iran पर किए गए हमले के बाद कई देशों के हवाई मार्गों पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। इसका असर अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
प्रदेश की ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार पिछले लगभग 10 दिनों में ही उन्हें करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। होली की लंबी छुट्टियों को देखते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने पहले से ही विदेश यात्रा की बुकिंग करवाई थी। लेकिन युद्ध की स्थिति बनने के बाद कई यात्रियों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दीं, जिससे एजेंसियों के कारोबार पर सीधा असर पड़ा है।
ट्रैवल एजेंसी संचालकों का कहना है कि होली वेकेशन के दौरान विदेश यात्रा करने वाले करीब 30 प्रतिशत यात्रियों ने अपनी बुकिंग कैंसिल कर दी है। सुरक्षा चिंताओं और उड़ानों की अनिश्चितता के कारण कई लोग फिलहाल विदेश यात्रा से बच रहे हैं। इससे एजेंसियों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में नुकसान और बढ़ सकता है। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, अगर मई और जून तक हालात सामान्य नहीं हुए, तो समर वेकेशन के दौरान प्रदेश की ट्रैवल एजेंसियों को करीब 200 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
छत्तीसगढ़ से विदेश जाने वाली अधिकतर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दुबई, अबूधाबी, दोहा, कतर और ओमान जैसे शहरों के जरिए कनेक्ट होती हैं। युद्ध की स्थिति के कारण इन क्षेत्रों से गुजरने वाली कई उड़ानों को एयरलाइंस ने सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया है। इसका असर यूरोप, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स पर भी पड़ा है।
हालांकि एयरलाइंस द्वारा फ्लाइट रद्द किए जाने की स्थिति में यात्रियों को पूरा रिफंड मिल जाता है, लेकिन यदि यात्री खुद टिकट रद्द करते हैं तो कुछ राशि काट ली जाती है।
इस बीच कई पर्यटक अब विदेश यात्रा की बजाय भारत के ही पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता देने लगे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग अब गोवा, केरल, कश्मीर और उत्तराखंड जैसे घरेलू पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी ले रहे हैं। छत्तीसगढ़ ट्रैवल एजेंट्स फेडरेशन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और यात्रियों को सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।