मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का बड़ा फैसला: एलपीजी को प्राथमिकता, गैस उत्पादन बढ़ाया, निर्यात पर भी असर

Tue 10-Mar-2026,11:51 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का बड़ा फैसला: एलपीजी को प्राथमिकता, गैस उत्पादन बढ़ाया, निर्यात पर भी असर India Gas Allocation Policy
  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने गैस आवंटन नीति में बदलाव किया।

  • एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी क्षेत्रों को दी गई प्राथमिकता।

  • रिफाइनरियों को 100% क्षमता पर चलाने और उत्पादन बढ़ाने के निर्देश।

Haryana / Ambala :

Ambala / पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलएनजी आपूर्ति में आई बाधा के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने घरेलू गैस आवंटन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए एलपीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों को भी प्राथमिकता श्रेणी में शामिल कर लिया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।

प्रधानमंत्री ने की उच्चस्तरीय बैठक
ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में मौजूदा हालात और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी उत्पादन क्षमता को पूरी तरह इस्तेमाल करें। फिलहाल देश की सभी रिफाइनरियां 100 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही हैं और एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी को मिलेगी प्राथमिकता
नई व्यवस्था के तहत घरेलू प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सबसे पहले एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस क्षेत्रों को दी जाएगी। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके बाद उर्वरक उद्योग को उसकी जरूरत का करीब 70 प्रतिशत गैस दिया जाएगा। वहीं चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत मांग का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत लगातार विभिन्न स्रोतों और मार्गों से ऊर्जा आयात कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी विचार
सरकारी सूत्रों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबे समय तक बना रहता है तो भारत गैस की आपूर्ति के लिए नॉर्वे और अमेरिका जैसे दूर के देशों से एलएनजी आयात करने के विकल्प पर भी विचार कर सकता है। हालांकि लंबी दूरी के कारण इसकी लॉजिस्टिक्स काफी जटिल और महंगी हो सकती है।

फिलहाल रूस से मिलने वाली तेल आपूर्ति भारत के लिए कुछ राहत दे रही है और इससे कच्चे तेल की जरूरतों को आंशिक रूप से पूरा किया जा रहा है।

निर्यात पर भी बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारत के निर्यात पर भी पड़ सकता है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों के साथ भारत का लगभग 40 से 50 अरब डॉलर का व्यापार है, जो अब जोखिम में दिखाई दे रहा है।

विशेष रूप से पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती धातु, रत्न एवं आभूषण, खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड फूड, टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ी चुनौती
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के करीब 6 से 7 लाख कंटेनर खाड़ी क्षेत्र के व्यापारिक मार्गों पर हैं। इनमें से लगभग 3.5 लाख कंटेनर फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए बताए जा रहे हैं।

कई जहाज अरब सागर और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं खाड़ी के अंदर गहराई में मौजूद कंटेनरों को बाहर निकालना और भी मुश्किल हो रहा है।

हालांकि निर्यात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन जहाजों को वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे शिपमेंट में देरी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार दोनों पर पड़ सकता है।

Watch Also: https://x.com/HardeepSPuri/status/2031345282957627863?s=20