भिवाड़ी के पास निर्माणाधीन साइट पर मिट्टी धंसने से बड़ा हादसा, 7 मजदूरों की मौत, कई दबे होने की आशंका
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Bhiwadi Accident News
भिवाड़ी के पास निर्माणाधीन साइट पर मिट्टी धंसने से बड़ा हादसा।
अब तक 7 मजदूरों की मौत, कई के दबे होने की आशंका।
देर से सूचना देने पर प्रशासन ने शुरू की जांच।
Bhiwadi / राजस्थान के भिवाड़ी से सटे हरियाणा क्षेत्र में दिल्ली-जयपुर हाईवे पर एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। कापड़ियावास इलाके में स्थित निर्माणाधीन सिग्नेचर ग्लोबल बिल्डर सोसाइटी में मिट्टी की खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंसने से कई मजदूर उसके नीचे दब गए। इस हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार यह घटना दिल्ली-जयपुर हाईवे पर होटल राव के सामने स्थित निर्माणाधीन साइट पर हुई, जहां मिट्टी की खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक बड़ी मात्रा में मिट्टी ढह गई और वहां काम कर रहे कई श्रमिक उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने की कोशिश की।
घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और मिट्टी में दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद अब तक 7 मजदूरों के शव बाहर निकाले जा चुके हैं। सभी शवों को भिवाड़ी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा कुछ घायल मजदूरों को भिवाड़ी और आसपास के अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
बताया जा रहा है कि अभी भी कुछ मजदूर मिट्टी के नीचे दबे हो सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन और बचाव दल लगातार जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मिट्टी हटाकर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरी तरह से यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि कोई और व्यक्ति मलबे में नहीं फंसा है, तब तक रेस्क्यू अभियान जारी रहेगा।
इस घटना की खबर फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में मजदूरों के परिजन और स्थानीय लोग पहुंच गए। अपने परिजनों की जानकारी पाने के लिए परिजन मौके पर परेशान नजर आए। वहीं कई लोगों ने इस हादसे के लिए लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
मामले में डीसीपी दीपक कुमार ने बताया कि यह हादसा शाम करीब 7 बजे हुआ था, लेकिन कंपनी की ओर से इसकी जानकारी जिला प्रशासन को लगभग रात 9:30 बजे दी गई। इतनी बड़ी घटना की सूचना देने में हुई इस देरी को गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक यदि प्रशासन को समय पर सूचना मिल जाती, तो रेस्क्यू कार्य जल्दी शुरू हो सकता था और शायद कुछ मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।
फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इतनी बड़ी दुर्घटना कैसे हुई और सूचना देने में देरी क्यों की गई।