विजयपुर उपचुनाव विवाद: मल्होत्रा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, रावत भी दिल्ली
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Vijaypur-Bypoll-Case-Malhotra-Supreme-Court
हाईकोर्ट ने नामांकन में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने के आरोप में मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था।
विजयपुर विधानसभा उपचुनाव मामले में मुकेश मल्होत्रा ने ग्वालियर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी की।
Vijaypur/ मध्यप्रदेश की विजयपुर विधानसभा उपचुनाव से जुड़ा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। ग्वालियर हाईकोर्ट द्वारा चुनाव निरस्त किए जाने के फैसले के बाद विधायक Mukesh Malhotra ने इसे चुनौती देने के लिए Supreme Court of India का रुख किया है। बताया जा रहा है कि मल्होत्रा इस फैसले के खिलाफ जल्द ही याचिका दाखिल करेंगे। वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता Ramnivas Rawat भी दिल्ली पहुंच गए हैं और मामले में केविएट दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।
मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार मुकेश मल्होत्रा ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी सलाह लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले की न्यायिक समीक्षा जरूरी है और इस मामले में सर्वोच्च अदालत से राहत मिलने की उम्मीद है।
दूसरी ओर भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। बताया जा रहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। केविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह होता है कि अदालत किसी भी मामले में एकतरफा सुनवाई न करे और संबंधित पक्ष को भी अपनी बात रखने का मौका मिले।
दरअसल, इससे पहले Madhya Pradesh High Court की ग्वालियर बेंच ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने अपने निर्णय में मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर दिया था और भाजपा उम्मीदवार रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक घोषित किया था। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
रामनिवास रावत ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी। याचिका के अनुसार मल्होत्रा के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उन्होंने अपने शपथपत्र में केवल दो मामलों का ही उल्लेख किया था।
अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा था कि चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवार द्वारा जानकारी छिपाना निर्वाचन नियमों का उल्लंघन है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनका चुनाव शून्य घोषित कर दिया था। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है, जिस पर प्रदेश की राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं।