पश्चिम एशिया संकट पर संसद में बोलेेंगे एस. जयशंकर, तेल की कीमतों और भारत पर असर पर देंगे बयान
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S. Jaishankar Parliament Statement
पश्चिम एशिया संकट पर संसद में बयान देंगे विदेश मंत्री एस. जयशंकर।
ईरान-इजरायल तनाव के कारण तेल की कीमतों में उछाल।
महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर सरकार की रणनीति पर नजर।
Delhi / पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान पर हो रहे लगातार हमलों के बीच भारत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। इस गंभीर स्थिति का भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, इसे लेकर सरकार संसद में विस्तृत जानकारी देने जा रही है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार को संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान देंगे। वह सुबह 11 बजे राज्यसभा और दोपहर 12 बजे लोकसभा में देश की स्थिति और सरकार की रणनीति पर जानकारी साझा करेंगे।
सरकार का यह बयान ऐसे समय में आ रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है। यह मुद्दा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक सुरक्षा और आम जनता के जीवन से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
विपक्ष ने उठाए महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा के सवाल
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा की मांग करते हुए नोटिस दिया है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के खर्चों पर पड़ेगा।
संजय सिंह ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह आम जनता को महंगाई के बोझ से बचाने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है।
उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में गैस सिलेंडर की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। यदि पश्चिम एशिया का संकट और गहराता है तो ईंधन और रसोई गैस की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे आम परिवारों के बजट पर भारी दबाव पड़ेगा।
तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की संभावना भी बढ़ जाएगी।
सरकार की रणनीति पर टिकी नजर
ऐसे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संसद में दिया जाने वाला बयान काफी अहम माना जा रहा है। इस बयान से यह स्पष्ट हो सकता है कि सरकार इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए क्या रणनीति बना रही है। साथ ही यह भी उम्मीद की जा रही है कि सरकार तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को संभावित झटके से बचाने के लिए अपनी योजनाओं की जानकारी देगी।
देशभर की निगाहें अब संसद में होने वाली इस चर्चा पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर करोड़ों भारतीयों की जेब और देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।