West Bengal Assembly Election | पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर हलचल तेज, दो या तीन चरणों में मतदान पर विचार
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West Bengal Assembly Election
पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर दो या तीन चरणों में मतदान पर चर्चा।
बीजेपी ने चुनाव आयोग को 17 सूत्री ज्ञापन सौंपा।
केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में निष्पक्ष चुनाव की मांग।
Kolkata / पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। चुनाव आयोग की टीम के हालिया दौरे के बाद राज्य में चुनावी तैयारियों और संभावित रणनीतियों पर चर्चा बढ़ गई है। इसी बीच यह जानकारी सामने आई है कि राज्य में विधानसभा चुनाव इस बार तीन की बजाय दो चरणों में भी कराए जा सकते हैं। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के साथ हुई बैठक में बीजेपी समेत कई राजनीतिक दल इस सुझाव पर सहमत नजर आए हैं।
चुनाव आयोग से बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की और राज्य के सुरक्षा माहौल को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं। बैठक के दौरान पार्टी ने आयोग को एक 17 सूत्री ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
बीजेपी ने अपने ज्ञापन में कहा कि चुनाव अधिकतम तीन चरणों में ही कराए जाने चाहिए, ताकि केंद्रीय सुरक्षा बलों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सके। पार्टी का मानना है कि कम चरणों में चुनाव होने से सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाई जा सकती है और मतदाताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।
केंद्रीय सुरक्षाबलों की भूमिका पर जोर
बीजेपी ने चुनाव आयोग से यह भी मांग की कि मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया केंद्रीय सुरक्षाबलों की निगरानी में कराई जाए। पार्टी का कहना है कि मतदान केंद्रों और काउंटिंग सेंटर पर राज्य पुलिस की भूमिका सीमित रखी जानी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की पक्षपात की आशंका न रहे।
इसके अलावा पार्टी ने सुझाव दिया कि हर मतदान केंद्र पर मतदाताओं की दो बार जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे फर्जी मतदान और अन्य अनियमितताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
पोलिंग पार्टी में कर्मचारियों का संतुलन
बीजेपी ने पोलिंग पार्टियों की संरचना को लेकर भी सुझाव दिया है। पार्टी का कहना है कि मतदान कराने वाली टीम में केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों का अनुपात 50:50 होना चाहिए। इससे चुनाव प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता बनी रह सकेगी।
मतगणना को लेकर भी बीजेपी ने स्पष्ट सुझाव दिया है कि काउंटिंग केवल जिला और उप-मंडल मुख्यालयों में ही कराई जाए। पार्टी के अनुसार इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और मतगणना प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकेगी।
संवेदनशील बूथों की पहचान की मांग
अपने ज्ञापन में बीजेपी ने यह भी कहा है कि पिछले तीन चुनावों में जहां हिंसा की घटनाएं हुई हैं या जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज हुआ है, ऐसे सभी मतदान केंद्रों को संवेदनशील बूथ घोषित किया जाना चाहिए।
पार्टी का मानना है कि इन बूथों पर विशेष निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती जरूरी है। साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों को काफी पहले से ही तैनात किया जाना चाहिए, ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों को समझ सकें और चुनाव के दौरान बेहतर तरीके से काम कर सकें।
तटस्थता बनाए रखने पर भी जोर
बीजेपी ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए भी एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। पार्टी ने कहा है कि सुरक्षा बलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे स्थानीय लोगों से किसी भी तरह का आतिथ्य, भोजन या अन्य सुविधा स्वीकार न करें। इससे उनकी तटस्थता और विश्वसनीयता बनी रहेगी।
कम चरणों में चुनाव कराने की मांग
बीजेपी का कहना है कि पिछले चुनावों में अधिक चरणों में मतदान होने के कारण कई जगह हिंसा, धांधली और मतदाताओं पर दबाव की घटनाएं सामने आई थीं। पार्टी का मानना है कि कम चरणों में चुनाव कराने से सुरक्षा बलों का बेहतर उपयोग होगा और पूरी चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बन सकेगी।
फिलहाल चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों से मिले सुझावों पर विचार कर रहा है। आने वाले समय में आयोग यह तय करेगा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कितने चरणों में कराए जाएंगे। राज्य की राजनीति में इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है।