छत्तीसगढ़ में बिजली दर बढ़ोतरी संभव, 65 लाख उपभोक्ताओं पर असर
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छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना, जिससे करीब 65 लाख उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर सीधा असर पड़ सकता है।
राज्य बिजली नियामक आयोग द्वारा टैरिफ समीक्षा अंतिम चरण में, पॉवर कंपनी के घाटे और राजस्व गैप को देखते हुए नए फैसले की तैयारी।
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार सब्सिडी या घाटे को चरणबद्ध तरीके से वसूलने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।
Raipur/ छत्तीसगढ़ में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्य के करीब 65 लाख उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission स्तर पर इस मुद्दे पर गंभीर मंथन जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही इस पर अंतिम फैसला सामने आ सकता है, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल प्रभावित होंगे।
आयोग द्वारा बिजली दरों की समीक्षा अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि आयोग ने Chhattisgarh State Power Company से अतिरिक्त वित्तीय जानकारी मांगी थी, जिसे अब उपलब्ध करा दिया गया है। इसके बाद नए टैरिफ को लेकर गहन विश्लेषण किया जा रहा है। संभावना है कि महीने के अंत तक नई दरों को लेकर घोषणा हो सकती है और अगले महीने से इन्हें लागू किया जा सकता है।
पॉवर कंपनी ने अपने वित्तीय आकलन में बताया है कि मौजूदा दरों के अनुसार उसे लगभग 26,216 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जबकि कुल व्यय करीब 25,460 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस आधार पर कंपनी को करीब 756 करोड़ रुपये का लाभ दिख रहा है, लेकिन यह लाभ वास्तविक वित्तीय स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
दरअसल, कंपनी पर पिछले वर्षों का भारी घाटा अभी भी बना हुआ है। पुराने रेवेन्यू गैप को जोड़ने के बाद कंपनी को लगभग 6,300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता बताई गई है। कुल मिलाकर कंपनी ने लगभग 32,500 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की जरूरत जताई है, जिसके आधार पर बिजली दरों में बढ़ोतरी की मांग की गई है।
यदि आयोग कंपनी के इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो बिजली दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ेगा।
हालांकि, उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार भी विकल्पों पर विचार कर रही है। एक विकल्प घाटे को तीन वर्षों में बांटने का है, जिससे तत्काल बढ़ोतरी का दबाव कम हो सके। दूसरा विकल्प सब्सिडी प्रदान करना है, जैसा कि पहले भी करीब 1,000 करोड़ रुपये की सहायता देकर किया गया था।
इस बीच, Revamped Distribution Sector Scheme के तहत मिलने वाली सहायता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण आयोग इस फैसले को बेहद सावधानी से लेने की दिशा में काम कर रहा है।