बोत्सवाना से 9 चीते कूनो पहुंचे
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Project-Cheetah-9-Cheetahs-From-Botswana-Kuno
भारत-बोत्सवाना सहयोग से वैश्विक चीता संरक्षण को बढ़ावा, वैज्ञानिक निगरानी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित स्थानांतरण प्रक्रिया।
बोत्सवाना से आए 9 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में संगरोध बाड़ों में रखा गया, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
Botswana/ भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना को एक और बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान के संगरोध बाड़ों में छोड़ा। इन चीतों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़े जाने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण और अनुकूलन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह कदम भारत की दीर्घकालिक वन्यजीव संरक्षण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि बोत्सवाना से आए नौ चीतों में छह मादा और तीन नर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘प्रोजेक्ट चीता’ उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। वर्तमान में भारत में कुल 48 चीते हैं, जिनमें 28 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं।
चीतों के भारत आगमन की प्रक्रिया विस्तृत अंतरराष्ट्रीय समन्वय के तहत पूरी की गई। दिसंबर 2024 में भारत सरकार ने बोत्सवाना सरकार के साथ औपचारिक बातचीत शुरू की थी। सितंबर 2025 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बोत्सवाना का दौरा कर परिवहन, स्वास्थ्य परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव स्थानांतरण मानकों के अनुरूप प्रक्रियाएं तय कीं।
27 फरवरी 2026 को चीतों को गैबोरोन हवाई अड्डे तक लाया गया और भारतीय वायु सेना की मदद से ग्वालियर पहुंचाया गया। वहां से हेलीकॉप्टर के माध्यम से उन्हें कूनो राष्ट्रीय उद्यान स्थानांतरित किया गया। मंत्री ने भारतीय वायु सेना की सटीक समन्वय और सुरक्षित उड़ान के लिए सराहना की।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी वैश्विक चीता संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अफ्रीका के पारंपरिक क्षेत्र से बाहर एक सुरक्षित और स्थायी आबादी विकसित की जा सकेगी। परियोजना का उद्देश्य स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाली चीता आबादी स्थापित करना और जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ करना है।