राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: संथाल इतिहास, भाषा और संस्कृति पर गर्व करें

Sat 07-Mar-2026,04:41 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: संथाल इतिहास, भाषा और संस्कृति पर गर्व करें President-Murmu-Santhal-History-Language-Culture-Message
  • राष्ट्रपति ने शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण को आदिवासी समुदायों के विकास का आधार बताते हुए युवाओं को आधुनिक प्रगति के साथ संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया।

  • उन्होंने तिलका माझी और 1855 के संथाल हुल आंदोलन के वीर नेताओं के योगदान को याद करते हुए आदिवासी इतिहास को देश की प्रेरणादायक विरासत बताया।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली/ भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने संथाल समुदाय के इतिहास, भाषा और सांस्कृतिक विरासत को देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संथाल समाज के पूर्वजों ने शोषण और अन्याय के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया और आज भी उनकी विरासत समाज को प्रेरणा देती है। राष्ट्रपति ने शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को आदिवासी समुदायों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी बताया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने कहा कि संथाल समुदाय के लिए यह गर्व का विषय है कि लगभग 240 वर्ष पहले उनके महान पूर्वज Tilka Majhi ने शोषण और अन्याय के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाकर आदिवासी समाज में संघर्ष और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत किया।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि इस विद्रोह के लगभग 60 वर्ष बाद संथाल समुदाय के महान वीर Sidhu Murmu और Kanhu Murmu ने अपने साथियों Chand Murmu, Bhairav Murmu, तथा वीर बहनों Phulo Murmu और Jhano Murmu के साथ मिलकर 1855 में ऐतिहासिक Santhal Hul आंदोलन का नेतृत्व किया था। यह आंदोलन आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संघर्ष था।

राष्ट्रपति ने वर्ष 2003 को संथाली समुदाय के इतिहास का महत्वपूर्ण वर्ष बताते हुए कहा कि उसी साल संथाली भाषा को भारत के संविधान की Eighth Schedule of the Constitution of India में शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee की जयंती पर ओल चिकी लिपि में लिखित संथाली भाषा में भारत का संविधान भी जारी किया गया, जो इस भाषा के सम्मान और संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1925 में महान साहित्यकार Pandit Raghunath Murmu ने Ol Chiki script का आविष्कार किया था, जिसने संथाली भाषी लोगों को अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम प्रदान किया। उन्होंने “बिदु चंदन”, “खेरवाल वीर”, “दलगे धन” और “सिदो कान्हू – संथाल हुल” जैसे नाटकों के माध्यम से समाज में साहित्यिक और सामाजिक चेतना फैलाने का कार्य किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदायों ने सदियों से अपनी लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को सुरक्षित रखा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने युवाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि संथाल समुदाय सहित सभी आदिवासी समाज प्रगति और प्रकृति के बीच संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।