भारत-ब्रिटेन नौसैनिक अभ्यास कोंकण-2026: INS त्रिशूल पहुंचा ब्रिटेन, समुद्र में दिखेगी ताकत
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India-UK Naval Exercise
INS त्रिशूल ब्रिटेन के प्लायमाउथ पहुंचा।
कोंकण-2026 नौसैनिक अभ्यास 8 से 15 अक्टूबर तक आयोजित होगा।
अभ्यास में समुद्री सुरक्षा, हवाई रक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों पर जोर रहेगा।
New Delhi / समुद्र में भारत और ब्रिटेन की नौसेनाएं एक बार फिर अपनी ताकत और रणनीतिक तालमेल का प्रदर्शन करने जा रही हैं। आधुनिक मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट INS त्रिशूल ब्रिटेन पहुंच चुका है। आखिर कोंकण-2026 में कौन-कौन से चुनौतीपूर्ण सैन्य अभ्यास होंगे?
भारत-ब्रिटेन नौसैनिक अभ्यास कोंकण-2026
भारत और ब्रिटेन के बीच समुद्री रक्षा सहयोग को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय नौसेना का आधुनिक मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत INS त्रिशूल ब्रिटेन के प्लायमाउथ पहुंच गया है। यह युद्धपोत रॉयल नेवी के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास कोंकण-2026 में हिस्सा लेगा।
यह अभ्यास 8 से 15 अक्टूबर 2026 तक ब्रिटेन के प्लायमाउथ के निकट आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय, पेशेवर सहयोग और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत बनाना है।
अब सवाल है कि इस बार कोंकण अभ्यास में क्या खास होने वाला है?
इस अभ्यास को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियां होंगी। इसमें दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों और कर्मियों के बीच पेशेवर संवाद, एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा, खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा, आमंत्रित अतिथियों को युद्धपोत देखने का अवसर भी मिलेगा।
लेकिन अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्री चरण होगा, जहां दोनों नौसेनाएं विभिन्न परिस्थितियों में संयुक्त परिचालन का अभ्यास करेंगी।
इस दौरान हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे होने वाली गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभ्यास में जहाजों पर विमान उतारने, फायरिंग, वायु रक्षा, जटिल नौचालन और पनडुब्बी-रोधी अभियानों जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इन अभ्यासों से दोनों नौसेनाओं को चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में बेहतर तालमेल के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा।
दो दशकों से मजबूत हो रही है समुद्री साझेदारी।
भारत और ब्रिटेन के बीच आयोजित होने वाला वार्षिक कोंकण अभ्यास दोनों देशों के रक्षा संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय के साथ इस अभ्यास का दायरा और जटिलता बढ़ी है। इससे दोनों नौसेनाओं को अपनी कार्यप्रणाली साझा करने और एक-दूसरे की परिचालन क्षमताओं को समझने का अवसर मिलता रहा है।
यह अभ्यास सुरक्षित, खुले और स्वतंत्र समुद्री क्षेत्र सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। साथ ही, यह भारत-ब्रिटेन दृष्टिकोण 2035 में निर्धारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के उद्देश्यों के अनुरूप है।
समुद्री सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभ्यास?
आज समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक संपर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में नौसेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त अभियानों का अनुभव समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में उपयोगी हो सकता है।
कोंकण-2026 के जरिए भारत और ब्रिटेन की नौसेनाएं अपने अनुभव साझा करेंगी और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में मिलकर काम करने की क्षमता को बेहतर बनाएंगी।
कुल मिलाकर, INS त्रिशूल की ब्रिटेन में मौजूदगी और कोंकण-2026 का आयोजन भारत-ब्रिटेन रक्षा साझेदारी के महत्वपूर्ण पहलू हैं। अब इस अभ्यास के दौरान होने वाली संयुक्त समुद्री गतिविधियों पर नजर रहेगी।