Operation Drishti 2026: 4,000 मरीजों का मुफ्त इलाज, 365 आंखों की सर्जरी! ओडिशा में कैसे मिली लोगों को नई रोशनी?
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Operation Drishti 2026
रायरंगपुर में 4,000 से अधिक मरीजों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिली।
आंखों की दृष्टि में सुधार के लिए 365 सर्जरी की गईं।
चक्रवात के कठिन मौसम के बावजूद मेडिकल टीमों ने सेवाएं जारी रखीं।
New Delhi / कल्पना कीजिए, किसी व्यक्ति की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती जा रही हो और इलाज के लिए उसे दूर शहरों के चक्कर लगाने पड़ें। लेकिन अगर विशेषज्ञ डॉक्टर खुद उसके घर के पास पहुंच जाएं, तो जिंदगी कितनी बदल सकती है? ओडिशा में ऐसा ही प्रयास देखने को मिला है।
ओडिशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा यानी एएफएमएस ने चिकित्सा सेवा का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। यहां 2 से 4 नवंबर 2026 तक तीन दिवसीय मल्टी-स्पेशियलिटी चिकित्सा शिविर ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के 12वें संस्करण का आयोजन किया गया। इस शिविर में 4 हजार से अधिक मरीजों का इलाज किया गया, जबकि आंखों की दृष्टि में सुधार के उद्देश्य से 365 सर्जरी की गईं। सबसे खास बात यह रही कि मरीजों को विशेषज्ञों की ओर से चिकित्सा परामर्श, जांच और उपचार पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया गया।
4 नवंबर को सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक एयर मार्शल संदीप थरेजा ने शिविर का दौरा किया। उन्होंने वहां इलाज करा रहे मरीजों और आंखों की सर्जरी के बाद देखभाल प्राप्त कर रहे लोगों से मुलाकात की। जिन मरीजों की आंखों का ऑपरेशन हुआ था, उन्हें दवाओं की किट भी दी गईं। एयर मार्शल थरेजा ने चिकित्सा टीमों के समर्पण और सेवा भावना की सराहना की। खास बात यह रही कि चक्रवात के कारण बने कठिन मौसम के बावजूद मेडिकल टीमों ने अपनी सेवाएं जारी रखीं और मरीजों को इलाज में किसी तरह की बाधा न आने देने का प्रयास किया।
इस शिविर में केवल आंखों का इलाज ही नहीं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों की जांच और उपचार की व्यवस्था भी की गई थी। नेत्र विज्ञान, हृदय रोग, गुर्दा रोग, त्वचा रोग, दंत चिकित्सा और सामान्य चिकित्सा के विशेषज्ञ एक ही स्थान पर मौजूद थे। मरीजों की स्क्रीनिंग और जांच के बाद वहीं उपचार किया गया। जिन लोगों को आगे विशेष इलाज की आवश्यकता थी, उन्हें उचित चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर भी किया गया।
आंकड़ों पर नजर डालें तो कार्डियोलॉजी विभाग ने 400 से अधिक मरीजों की जांच की। यहां 298 ईसीजी और 406 इकोकार्डियोग्राम किए गए। इसके अलावा 29 मरीजों की पहचान की गई, जिन्हें एंजियोग्राफी, सीटी एंजियोग्राफी, वाल्व सर्जरी और अन्य विशेष प्रक्रियाओं की जरूरत थी।
वहीं, नेफ्रोलॉजी विभाग ने 400 से अधिक मरीजों का इलाज किया और 341 अल्ट्रासाउंड जांच कीं। त्वचा रोग विभाग ने 500 से अधिक मरीजों को देखा। दंत चिकित्सा टीम ने 221 मरीजों का इलाज करते हुए 198 प्रक्रियाएं पूरी कीं, जबकि सामान्य चिकित्सा विभाग ने 339 मरीजों को परामर्श और उपचार दिया।
इस शिविर की सफलता को कुछ मरीजों की कहानियां और भी खास बनाती हैं। 75 वर्षीय विश्वनाथ की आंख में पुरानी चोट के कारण मोतियाबिंद की जटिल स्थिति बन गई थी। डॉक्टरों ने उनकी मैनुअल स्मॉल-इन्सिजन मोतियाबिंद सर्जरी की और स्क्लेरल-फिक्सेटेड इंट्राओकुलर लेंस लगाया। इससे उनकी दृष्टि में सुधार की संभावना बनी है।
इसी तरह 60 वर्षीय सोमबारी गोप की आंख में मोतियाबिंद काफी गहरा था और आंख का आकार भी छोटा था। विशेषज्ञों ने सफलतापूर्वक सर्जरी कर पोस्टीरियर चैंबर लेंस लगाया, जिससे कॉर्निया की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिली।
गौरतलब है कि रायरंगपुर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का गृह क्षेत्र है। ऐसे क्षेत्र में आयोजित यह शिविर उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिन्हें अपने आसपास उन्नत चिकित्सा सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं।
दरअसल, ‘ऑपरेशन दृष्टि’ एएफएमएस की ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के दूर-दराज के क्षेत्रों तक विशेष नेत्र देखभाल और बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है। रायरंगपुर में इस शिविर के जरिए हजारों लोगों को उनके घर के पास मुफ्त विशेषज्ञ उपचार मिला।
यह आयोजन दिखाता है कि चिकित्सा सेवा का वास्तविक उद्देश्य केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना भी है।