आयुर्वेद पर वैज्ञानिक शोध जरूरी! उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का बड़ा संदेश

Thu 15-Oct-2026,10:16 PM IST +05:30

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आयुर्वेद पर वैज्ञानिक शोध जरूरी! उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का बड़ा संदेश Ayurveda Research
  • उपराष्ट्रपति ने आयुर्वेद में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार पर जोर दिया।

  • कौमारकॉन-2026 में बाल स्वास्थ्य, पोषण और रोगों की रोकथाम पर चर्चा हुई।

  • आयुष स्टार्ट-अप पोर्टल, आयुदिवा और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया गया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / क्या आयुर्वेद को वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए दुनिया भर में नई पहचान मिल सकती है? क्या पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मिलकर बेहतर परिणाम दे सकती हैं? नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उपराष्ट्रपति ने इन सवालों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया है।

भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और प्रमाण आधारित चिकित्सा को बढ़ावा देने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

वे अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान यानी एआईआईए द्वारा आयोजित कौमारभृत्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे संस्करण ‘कौमारकॉन-2026’ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान से पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों की प्रभावकारिता को समझने और स्थापित करने में मदद मिलेगी। इससे मरीजों का विश्वास मजबूत होगा और भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने में भी सहायता मिल सकती है।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का उल्लेख किया, जिसके तहत अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के समकक्ष विकसित करने की परिकल्पना की गई है। एआईआईए के दसवें स्थापना दिवस पर उन्होंने संस्थान को बधाई दी और अनुसंधान, नवाचार तथा अकादमिक उत्कृष्टता पर लगातार काम करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां सदियों पुराने ज्ञान और सभ्यतागत अनुभव की अमूल्य विरासत हैं। वर्ष 2014 में आयुष मंत्रालय के गठन के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए गए हैं। आयुष मंत्रालय और आईसीएमआर, सीएसआईआर, डीबीटी, डीएसटी तथा एम्स जैसे संस्थानों के बीच सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति ने प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आयुष सेवाओं के एकीकरण को पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच सहयोग बढ़ाने का अवसर बताया। उन्होंने योग को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान और जामनगर में विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना को भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।

सम्मेलन में बाल स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि बच्चों के पोषण, शारीरिक वृद्धि, मानसिक और भावनात्मक कल्याण तथा रोगों की रोकथाम पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने शोधकर्ताओं और चिकित्सकों से पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने के साथ-साथ वैज्ञानिक परीक्षण और अनुसंधान के जरिए उसे मजबूत बनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बच्चों का स्वस्थ विकास बेहद महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने आयुष स्टार्ट-अप पोर्टल, एआईआईए-आईसीएआईएनई वेबसाइट और आयुर्वेद डिजिटल नवाचार एवं उद्यम त्वरण सुविधा ‘आयुदिवा’ का उद्घाटन किया। इसके अलावा वामन ऐप और पंचकर्म आकलन ऐप भी लॉन्च किए गए। अमेरिका की महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी और एआईआईए के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी हुआ।

कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, चिकित्सा विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अब सवाल यह है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के सहयोग से आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर कितनी मजबूती मिलती है। आने वाले समय में शोध के परिणाम और मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।