किसानों का जीवन आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता: चिंतन शिविर में जेपी नड्डा ने कहा

Sun 04-Jan-2026,12:02 AM IST +05:30

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किसानों का जीवन आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता: चिंतन शिविर में जेपी नड्डा  ने कहा किसान चिंतन शिविर में जेपी नड्डा
  • जेपी नड्डा ने कहा, किसानों का जीवन आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता, उर्वरक नीति में किसान केंद्र में।

  • विकट परिस्थितियों में भी समय पर उर्वरक आपूर्ति, आयात और उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी।

  • संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ खेती के लिए सरकार, पीएसयू और निजी क्षेत्र का साझा प्रयास।

Delhi / New Delhi :

दिल्ली/ नई दिल्ली में आयोजित उर्वरक विभाग के चिंतन शिविर में केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि किसानों का जीवन आसान बनाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 3 जनवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उर्वरक उपलब्धता, संतुलित उपयोग और टिकाऊ खेती जैसे अहम मुद्दों पर सरकार के दृष्टिकोण को रखा। कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद समय पर उर्वरक आपूर्ति को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया।

भारत सरकार के उर्वरक विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली में एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य किसानों को केंद्र में रखकर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन, समय पर उर्वरक उपलब्धता और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर मंथन करना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय उर्वरक और रसायन मंत्री श्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की हर नीति का मूल उद्देश्य किसानों का जीवन सरल बनाना है।

जेपी नड्डा ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति बाधाओं, भू-राजनीतिक तनावों और कच्चे माल की कमी जैसी विकट परिस्थितियों के बावजूद उर्वरक विभाग ने पूरे देश में किसानों तक उर्वरक समय पर पहुंचाए। उन्होंने बताया कि किसान हितैषी नीतियों के कारण इस वर्ष उर्वरकों के आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि खेती के अलावा अन्य क्षेत्रों में उर्वरकों के दुरुपयोग की समस्या से निपटने के लिए सरकार के विभिन्न विभाग आपसी समन्वय से कार्य करेंगे। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि भारत विश्व का खाद्य भंडार बने। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस चिंतन शिविर से निकले सुझाव भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सहायक होंगे। उर्वरक सचिव श्री रजत कुमार मिश्र ने कहा कि सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) और निजी क्षेत्र ने किसानों को मंथन के केंद्र में रखा है। शिविर को ऐसा मंच बनाया गया, जहां हर हितधारक अपने विचार रख सके।

चिंतन शिविर के दौरान 15 अलग-अलग समूहों ने उर्वरक क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। इनमें उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता, डिजिटल उर्वरक इकोसिस्टम, किसानों से संवाद, पोषण आधारित सब्सिडी और भविष्य की कृषि चुनौतियां शामिल रहीं। उर्वरक विभाग के सभी 9 पीएसयू, सहकारी और निजी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।

यह चिंतन शिविर सरकार की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें किसान, टिकाऊ खेती और आत्मनिर्भर उर्वरक व्यवस्था को भविष्य की कृषि नीति का आधार बनाया गया है।