राष्ट्रपति मुर्मु ने सिद्धगंगा मठ में स्वामीजी को श्रद्धांजलि, सेवा पर जोर

Thu 16-Apr-2026,01:40 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति मुर्मु ने सिद्धगंगा मठ में स्वामीजी को श्रद्धांजलि, सेवा पर जोर President-Murmu-Siddaganga-Mutt-tribute-Shivakumara-Swamiji
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तुमकुरु के श्री सिद्धगंगा मठ में शिवकुमार स्वामीजी के 119वें जन्मोत्सव पर भाग लेकर उनके योगदान को याद किया।

  • उन्होंने शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिकता को समाज निर्माण का आधार बताते हुए मठ के कार्यों को समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण कहा।

Karnataka / Tumkur :

Siddaganga Mutt/ कर्नाटक के तुमकुरु स्थित श्री सिद्धगंगा मठ में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भाग लेकर डॉ. शिवकुमार महास्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि स्वामीजी जैसे संत समाज और राष्ट्र के आध्यात्मिक स्तंभ होते हैं, जिनकी प्रेरणा पीढ़ियों तक बनी रहती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भले ही स्वामीजी का भौतिक शरीर 2019 में पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनकी आध्यात्मिक विरासत आज भी जीवित है और समाज को मार्गदर्शन दे रही है। उन्होंने स्वामीजी के जीवन को सेवा, समर्पण और करुणा का अद्भुत उदाहरण बताया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने श्री सिद्धगंगा मठ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। मठ द्वारा प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक की सुविधा उपलब्ध कराना समाज के वंचित वर्गों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वामीजी के मार्गदर्शन में स्थापित सिद्धगंगा अस्पताल आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह सेवा भाव और मानवता के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान और शिक्षा ही व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की नींव हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार है और समाज के कमजोर वर्गों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।

उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित छात्रों को शिक्षा उपलब्ध कराने के मठ के प्रयासों की सराहना की और इसे समावेशी समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि परिश्रम, जनसेवा और राष्ट्रसेवा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आध्यात्मिकता इन सभी का आधार है, जो व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनाती है।

उन्होंने कर्नाटक राज्य की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि यह प्रदेश जनसेवा, आध्यात्मिकता और आधुनिक विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां के लोगों ने राष्ट्र निर्माण में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है।

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि कर्नाटक भविष्य में भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण, परोपकार और कर्तव्य के प्रति समर्पण ही स्वामीजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह कार्यक्रम न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि समाज सेवा और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करने वाला एक प्रेरणादायक अवसर भी साबित हुआ।