खरीफ 2026 से खाद लेने डिजिटल आईडी जरूरी, किसानों के लिए बड़ा बदलाव

Wed 15-Apr-2026,12:08 PM IST +05:30

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खरीफ 2026 से खाद लेने डिजिटल आईडी जरूरी, किसानों के लिए बड़ा बदलाव Fertilizer-Digital-Id-Mandatory-Farmers-Kharif-2026
  • 2026-27 खरीफ सीजन से उर्वरक वितरण के लिए डिजिटल पहचान अनिवार्य, किसानों को फसल और भूमि के आधार पर मिलेगी खाद की मात्रा।

  • सरकार का लक्ष्य जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाकर पारदर्शी और व्यवस्थित उर्वरक वितरण प्रणाली लागू करना है।

/ Raipur :

Raipur/ कृषि क्षेत्र में सुधार और अनियमितताओं पर नियंत्रण के उद्देश्य से राज्य सरकार ने उर्वरक वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक प्राप्त करने के लिए एक विशेष डिजिटल पहचान प्रणाली में पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से लागू किया जाएगा।

इस नई प्रणाली में उर्वरकों का वितरण पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा। किसानों की भूमि, फसल और आवश्यकताओं के आधार पर ही उन्हें खाद की मात्रा तय कर दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर किसान को उसकी वास्तविक जरूरत के अनुसार ही उर्वरक मिले और किसी भी प्रकार का दुरुपयोग न हो।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से जमाखोरी, कालाबाजारी और अनियमित वितरण जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा। साथ ही यह प्रक्रिया पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनेगी, जिससे किसानों को समय पर और उचित मात्रा में उर्वरक मिल पाएंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों का इस प्रणाली में पंजीयन नहीं होगा, वे कई महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित रह सकते हैं। इनमें उर्वरक वितरण के अलावा नकद सहायता योजनाएं, बीज और कीटनाशकों पर मिलने वाली सब्सिडी, कृषि यंत्रों पर अनुदान और सरकारी खरीद केंद्रों पर फसल बेचने की सुविधा शामिल है।

पंजीयन के लिए किसानों को आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज, बैंक खाता और मोबाइल नंबर जैसे जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन कर प्रत्येक किसान को एक यूनिक पहचान प्रदान की जाएगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के लगभग 79 प्रतिशत किसानों का सत्यापन पहले ही किया जा चुका है। शेष किसानों का पंजीयन कार्य तेजी से जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी किसानों को जल्द से जल्द इस प्रणाली से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

यह पहल कृषि क्षेत्र में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर सुविधाएं और पारदर्शी व्यवस्था मिल सकेगी।