एम्स नागपुर में राष्ट्रपति मुर्मु का संबोधन, चिकित्सा सेवा पर जोर

Wed 15-Apr-2026,04:12 PM IST +05:30

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एम्स नागपुर में राष्ट्रपति मुर्मु का संबोधन, चिकित्सा सेवा पर जोर President-Murmu-Aiims-Nagpur-Convocation-Speech
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एम्स नागपुर दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों को सेवा, संवेदनशीलता और नैतिकता के साथ कार्य करने का संदेश दिया।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में AI और डिजिटल तकनीकों को अपनाने पर जोर, ग्रामीण-शहरी असमानता दूर करने के लिए नवाचार की आवश्यकता बताई।

  • युवा डॉक्टरों को आजीवन सीखने, अनुसंधान और मरीजों के हित को सर्वोपरि रखने की सलाह, विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर।

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur/ राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने मंगलवार को नागपुर स्थित AIIMS Nagpur के दीक्षांत समारोह में शामिल होकर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े छात्रों और पेशेवरों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने डॉक्टरों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और मानवता की सेवा का मार्ग है।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर न केवल रोगों का इलाज करते हैं, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के मन में आशा और विश्वास भी जगाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी डॉक्टरों को संवेदनशीलता और सहानुभूति बनाए रखनी चाहिए। साथ ही उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे चिकित्सा पेशेवरों के प्रति सम्मान का भाव रखें, जिससे डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का संबंध मजबूत बना रहे।

उन्होंने कहा कि नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य राष्ट्र की प्रगति के लिए बेहद आवश्यक है। पिछले एक दशक में भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनमें देशभर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना शामिल है। इससे न केवल बेहतर इलाज की सुविधा बढ़ी है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के अवसर भी विस्तृत हुए हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि एम्स नागपुर ने कम समय में ही चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए इसे भविष्य में और बेहतर योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ सेवाएं और उन्नत अनुसंधान चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं। इन तकनीकों को अपनाकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता को कम किया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने डॉक्टरों के नैतिक दायित्वों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि समाज में उनका स्थान अत्यंत सम्मानजनक है और उन्हें हमेशा मरीजों के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने युवा डॉक्टरों से आजीवन सीखने, नवाचार और अनुसंधान को अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती। डॉक्टरों को इन मूल्यों को हमेशा बनाए रखना चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग मानवता की सेवा का अनूठा अवसर पाते हैं। उन्हें इस जिम्मेदारी पर गर्व करना चाहिए और इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा डॉक्टर देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देंगे और विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।