अर्बन चैलेंज फंड लॉन्च, शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को बढ़ावा

Wed 15-Apr-2026,05:07 PM IST +05:30

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अर्बन चैलेंज फंड लॉन्च, शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को बढ़ावा Urban-Challenge-Fund-Launch-India-Infrastructure
  • केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड और CRGSS लॉन्च किया, 1 लाख करोड़ की योजना से शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

  • जल, परिवहन, स्वच्छता और स्मार्ट सिटी विकास पर फोकस, 2030-31 तक शहरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम।

  • PPP मॉडल और बाजार आधारित फंडिंग से शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य, छोटे शहरों को भी ऋण गारंटी का लाभ।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar ने बुधवार को नई दिल्ली में अर्बन चैलेंज फंड (UCF) और ऋण पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना (CRGSS) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav और ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड भारत के शहरी विकास मॉडल में एक बड़ा परिवर्तन लाने वाला कदम है। यह केवल अनुदान आधारित योजना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक निवेश के माध्यम से बड़े पैमाने पर निजी और बाजार आधारित निवेश को आकर्षित करने का माध्यम बनेगा।

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत कुल 1 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी, जो परियोजनाओं की लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत होगी। शेष राशि नगरपालिका बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के जरिए जुटाई जाएगी, जिससे वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

इस योजना में 90,000 करोड़ रुपये परियोजनाओं के लिए, 5,000 करोड़ रुपये क्षमता निर्माण और 5,000 करोड़ रुपये CRGSS के लिए निर्धारित किए गए हैं। CRGSS योजना विशेष रूप से छोटे और मध्यम शहरों को ऋण गारंटी के माध्यम से वित्तीय सहायता दिलाने में मदद करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह फंड पुराने शहरी क्षेत्रों के पुनर्विकास, शहरी परिवहन, जल और स्वच्छता, अंतिम मील कनेक्टिविटी और जलवायु अनुकूल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा।

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकिथला ने कहा कि भारत का शहरीकरण अब निर्णायक चरण में है और यह योजना शहरों को वित्तीय रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।

कार्यक्रम के दौरान एक ई-डायरेक्टरी भी लॉन्च की गई, जिससे शहरों को वित्तीय संस्थानों और निवेशकों से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही राज्यों और मंत्रालय के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए और विभिन्न संस्थाओं के साथ सहयोग के लिए समझौते भी हुए। यह योजना 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य शहरों को आर्थिक विकास के नए केंद्रों के रूप में विकसित करना है।