निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत बाजार पहुंच सहायता से MSME निर्यात को नई रफ्तार
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Market Access Assistance Export Promotion Mission India
तीन से पांच साल का अग्रिम बाजार कैलेंडर निर्यात योजना, निरंतरता और वैश्विक बाजार विकास को मजबूत करेगा।
डिजिटल निगरानी, फीडबैक और लीड ट्रैकिंग से निर्यात परिणामों का डेटा-आधारित मूल्यांकन संभव होगा।
Delhi/ केंद्र सरकार ने भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के अंतर्गत बाजार पहुंच सहायता (एमएएस) पहल की शुरुआत की है। यह पहल 12 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से अनुमोदित की गई थी और अब इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), पहली बार निर्यात करने वालों और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों की कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक संगठित और प्रभावी पहुंच प्रदान करना है।
बाजार पहुंच सहायता पहल को निर्यात प्रोत्साहन मिशन की निर्यात दिशा उप-योजना के अंतर्गत लागू किया जा रहा है। इसका संचालन वाणिज्य विभाग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास, निर्यात प्रोत्साहन परिषदें, कमोडिटी बोर्ड और उद्योग संघ इस प्रक्रिया में समन्वय की भूमिका निभाएंगे।
एमएएस के तहत क्रेता-विक्रेता बैठकें (BSM), अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी, भारत में आयोजित मेगा रिवर्स बीएसएम तथा प्राथमिकता और उभरते बाजारों में व्यापार प्रतिनिधिमंडलों को संरचित वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार ने प्रमुख बाजार पहुंच कार्यक्रमों के लिए तीन से पांच वर्ष का अग्रिम कैलेंडर तैयार करने का प्रावधान किया है, जिससे निर्यातकों को समय रहते योजना बनाने में सुविधा मिलेगी।
इस पहल के अंतर्गत यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक समर्थित कार्यक्रम में कम से कम 35 प्रतिशत भागीदारी MSME इकाइयों की होगी। निर्यात विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए नए भौगोलिक क्षेत्रों और छोटे बाजारों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रतिनिधिमंडलों का न्यूनतम आकार 50 प्रतिभागियों का रखा गया है, हालांकि रणनीतिक आवश्यकता के अनुसार लचीलापन भी प्रदान किया जाएगा।
छोटे निर्यातकों को विशेष प्रोत्साहन देते हुए, पिछले वर्ष 75 लाख रुपये तक के निर्यात कारोबार वाले उद्यमों को आंशिक हवाई किराया सहायता देने का निर्णय लिया गया है। सभी प्रक्रियाएं जैसे कार्यक्रम सूचीकरण, प्रस्ताव स्वीकृति, निधि निर्गमन और निगरानी को trade.gov.in पोर्टल के माध्यम से डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है।
सरकार ने परिणाम आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रत्येक कार्यक्रम के लिए अनिवार्य ऑनलाइन फीडबैक तंत्र लागू किया है। भविष्य में संभावित विदेशी खरीदारों के लिए उत्पाद प्रदर्शन और अवधारणा प्रमाण से जुड़े नए घटक भी जोड़े जाएंगे। इस पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में मजबूती से स्थापित करना और निर्यात वृद्धि को दीर्घकालिक आधार प्रदान करना है।