भारतीय इतिहास: प्राचीन सभ्यता से आधुनिक स्वतंत्र भारत तक
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Vedic-Period
प्राचीन सभ्यताओं से भारत की नींव मजबूत हुई.
मध्यकालीन साम्राज्यों ने कला और शासन को आकार दिया.
स्वतंत्रता आंदोलन ने आधुनिक भारत का निर्माण किया.
Nagpur / भारतीय इतिहास विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यताओं में गिना जाता है। इसकी यात्रा सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू होकर आधुनिक लोकतांत्रिक भारत तक पहुँचती है। यह इतिहास केवल राजाओं और युद्धों की कहानी नहीं है, बल्कि समाज, संस्कृति, धर्म, दर्शन और जनआंदोलनों का जीवंत दस्तावेज़ भी है।
इतिहास की शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता (3300–1700 ईसा पूर्व) से होती है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे नगर नियोजित शहरी जीवन, जल निकासी व्यवस्था और व्यापारिक समृद्धि के प्रमाण देते हैं। इसके बाद वैदिक काल (1500–500 ईसा पूर्व) आया, जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की रचना हुई। इसी काल में सामाजिक संरचना, यज्ञ परंपरा और दार्शनिक चिंतन विकसित हुआ।
600 ईसा पूर्व के आसपास भारत में 16 महाजनपदों का उदय हुआ। इसी दौर में भगवान बुद्ध और महावीर स्वामी ने अहिंसा, करुणा और नैतिक जीवन का संदेश दिया, जिसने भारतीय समाज को गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद मौर्य साम्राज्य (322–185 ईसा पूर्व) ने भारत को पहली बार राजनीतिक रूप से एकीकृत किया। चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक के शासनकाल में प्रशासन, धर्म और संस्कृति को नई दिशा मिली।
इसके पश्चात गुप्त साम्राज्य (320–550 ई.) आया, जिसे भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है। इस काल में विज्ञान, गणित, खगोल, कला और साहित्य में अद्भुत प्रगति हुई। आर्यभट्ट, कालिदास और शून्य की अवधारणा इसी युग की देन हैं। दक्षिण भारत में चोल, चेर और पांड्य तथा उत्तर-पश्चिम में राजपूत राज्यों ने क्षेत्रीय शक्ति के रूप में योगदान दिया।
मध्यकाल में दिल्ली सल्तनत (1206–1526) और फिर मुगल साम्राज्य (1526–1857) ने भारतीय राजनीति और संस्कृति को नया स्वरूप दिया। अकबर की नीति, स्थापत्य कला और प्रशासनिक व्यवस्था आज भी ऐतिहासिक महत्व रखती है। दक्षिण में विजयनगर और बहमनी साम्राज्य सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से समृद्ध रहे।
आधुनिक काल की शुरुआत यूरोपीय आगमन से मानी जाती है। 1498 में वास्को-दा-गामा के भारत आने और 1600 में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के बाद अंग्रेजों का प्रभाव बढ़ता गया। 1757 (प्लासी) और 1764 (बक्सर) की लड़ाइयों के बाद भारत पर ब्रिटिश शासन स्थापित हुआ। 1857 का विद्रोह स्वतंत्रता की पहली बड़ी चिंगारी था।
आगे चलकर 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित रूप दिया। अंततः लंबा संघर्ष और बलिदान रंग लाया और 1947 में भारत स्वतंत्र राष्ट्र बना। इस प्रकार भारतीय इतिहास संघर्ष, समन्वय और निरंतर विकास की अद्भुत गाथा है, जो आज भी हमें दिशा और प्रेरणा देता है।