ग्रीनलैंड विवाद के बीच डेनमार्क में समय से पहले आम चुनाव की घोषणा, 24 मार्च 2026 को मतदान
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Denmark Election 2026
24 मार्च 2026 को डेनमार्क में आम चुनाव.
ग्रीनलैंड और राष्ट्रीय संप्रभुता प्रमुख चुनावी मुद्दे.
अमेरिका-यूरोप संबंध और आर्कटिक सुरक्षा पर जोर.
Denmark / डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने संसद में अचानक आम चुनाव की घोषणा कर देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अब 24 मार्च 2026 को संसदीय चुनाव होंगे, जबकि पहले यह चुनाव अक्टूबर 2026 में निर्धारित थे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दबाव बढ़ाने की खबरें सुर्खियों में हैं।
संसद में विशेष बयान देते हुए फ्रेडरिक्सन ने कहा कि उन्होंने राजा फ्रेडरिक को चुनाव कराने की सिफारिश की है और तारीख तय कर दी गई है। उन्होंने इसे डेनमार्क और पूरे यूरोप के लिए “निर्णायक मोड़” बताया। उनके अनुसार आने वाले वर्ष सुरक्षा, संप्रभुता और अमेरिका के साथ संबंधों की नई परिभाषा तय करने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि डेनमार्क और यूरोप को अगले चार वर्षों में आत्मनिर्भर और अधिक मजबूत बनना होगा।
सुरक्षा और संप्रभुता बने मुख्य मुद्दे
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने डेनमार्क की राजनीति को झकझोर दिया है। ट्रंप ने एक बार फिर 2019 की अपनी मांग दोहराई कि अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है। इस बयान के बाद डेनमार्क सरकार ने सख्त रुख अपनाया। फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और उसकी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा।
ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र का विशाल द्वीप है, जो डेनिश साम्राज्य का हिस्सा है लेकिन घरेलू मामलों में स्वायत्त है। इसकी रणनीतिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों के कारण वैश्विक शक्तियों की नजर लंबे समय से इस पर रही है। हाल के घटनाक्रम ने इस मुद्दे को फिर केंद्र में ला दिया है।
डेनमार्क ने जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय साझेदारों के साथ आर्कटिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत किया है। ग्रीनलैंड में यूरोपीय सेनाओं की तैनाती बढ़ाई जा रही है। इससे फ्रेडरिक्सन की अंतरराष्ट्रीय छवि एक मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में उभरी है।
‘ग्रीनलैंड बाउंस’ और राजनीतिक गणित
विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनावी घोषणा “ग्रीनलैंड बाउंस” का फायदा उठाने की रणनीति हो सकती है। ट्रंप के दबाव के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाने के बाद फ्रेडरिक्सन और उनकी सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी की लोकप्रियता में बढ़ोतरी देखी गई है। हाल के ओपिनियन पोल में उनकी व्यक्तिगत रेटिंग और पार्टी समर्थन दोनों में सुधार हुआ है, खासकर स्थानीय चुनावों में मिली पिछली निराशा के बाद।
फ्रेडरिक्सन 2019 से सत्ता में हैं और 2022 से एक दुर्लभ क्रॉस-ब्लॉक गठबंधन का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें सोशल डेमोक्रेट्स, मॉडरेट्स और लिबरल्स शामिल हैं। उन्होंने प्रवासन नीति में सख्त रुख अपनाया है और मजबूत सीमा नियंत्रण की वकालत की है, जिससे वे यूरोप में अलग पहचान बना चुकी हैं।
आगे की राह
अब चुनावी अभियान में सुरक्षा, यूरोपीय एकता, अमेरिका के साथ संबंध और आर्कटिक क्षेत्र की रणनीति प्रमुख मुद्दे होंगे। फ्रेडरिक्सन ने साफ कहा है कि डेनमार्क को खुद पर भरोसा करते हुए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी होगी और यूरोप के भीतर सहयोग मजबूत करना होगा।
आगामी चुनाव केवल सरकार बदलने या न बदलने का फैसला नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि डेनमार्क वैश्विक दबावों के बीच अपनी संप्रभुता और भूमिका को कैसे परिभाषित करता है। ग्रीनलैंड का मुद्दा अब केवल भू-राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान और राजनीतिक भविष्य का भी प्रश्न बन चुका है।